YC न्यूज़ डेस्क। भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय की स्वशासी संस्था सांस्कृतिक स्रोत एवं प्रशिक्षण केंद्र (CCRT), नई दिल्ली द्वारा क्षेत्रीय केंद्र उदयपुर में दिनांक 02 से 06 फरवरी 2026 तक “रचनात्मक पुतलीकला की विरासत” विषय पर राष्ट्रीय स्तर का पुनश्चर्या पाठ्यक्रम सफलतापूर्वक आयोजित किया गया। इस कार्यशाला में देश के 15 राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों से कुल 117 शिक्षक-शिक्षिकाओं ने सहभागिता की। प्रशिक्षण कार्यक्रम में आंध्र प्रदेश, बिहार, छत्तीसगढ़, गोवा, गुजरात, हरियाणा, जम्मू-कश्मीर, केरल, महाराष्ट्र, मणिपुर, पंजाब, तमिलनाडु, तेलंगाना, उत्तर प्रदेश एवं उत्तराखंड के शिक्षक शामिल हुए। छत्तीसगढ़ से कुल 8 शिक्षकों ने प्रशिक्षण प्राप्त किया, जिनमें दुर्ग जिले से टिकेश्वर प्रसाद गजपाल, कृष्ण कुमार साहू, राघवेंद्र कुमार ध्रुव, यादराम साहू, पंकज सिंह राजपूत, बालोद जिले से एमन सिंह साहू, राजनांदगांव से गोस्वामी दास वैष्णव तथा बेमेतरा जिले से ऊषा वर्मा शामिल रहीं।
कार्यशाला के दौरान भारतीय संस्कृति में क्षेत्रीय संस्कृति का योगदान विषयक सत्र में छत्तीसगढ़ के प्रतिभागी शिक्षकों द्वारा पारंपरिक वेशभूषा में छत्तीसगढ़ी लोक-संस्कृति एवं लोकनृत्य की प्रभावशाली प्रस्तुति दी गई, जिसे विशिष्ट अतिथियों एवं CCRT के अधिकारियों ने विशेष रूप से सराहा। प्रशिक्षण के अंतर्गत शिल्पकला सत्रों में पेपरमेशी, बांधनी एवं मृदा शिल्प पर आधारित प्रयोगात्मक कक्षाएँ भी आयोजित की गईं, जिनमें प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। यह कार्यशाला राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ की 150वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में आयोजित राष्ट्रव्यापी उत्सव का हिस्सा रही, जिसका उद्देश्य स्वतंत्रता संग्राम की प्रेरणा एवं भारतीय सांस्कृतिक विरासत को जीवंत बनाए रखना है। कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागी शिक्षकों को राजकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय धार का शैक्षणिक अवलोकन भी कराया गया, जहां शिक्षकों एवं विद्यार्थियों के मध्य संवादात्मक एवं प्रभावी शैक्षिक गतिविधियाँ आयोजित की गईं। इस प्रशिक्षण से शिक्षकों को विभिन्न राज्यों की संस्कृति एवं नवीन शैक्षिक गतिविधियों को समझने का अवसर मिला।
प्रशिक्षण के समापन अवसर पर पुरातत्व विभाग के प्रमुख एवं विद्यापीठ साहित्य संस्थान उदयपुर के प्रोफेसर श्री जीवन लाल खड़गवाल द्वारा सभी प्रतिभागी शिक्षकों को प्रशस्ति पत्र प्रदान किए गए। प्रतिभागियों ने प्राप्त अनुभवों को अपने कार्यक्षेत्र में निष्ठा और प्रतिबद्धता के साथ लागू करने का संकल्प लिया।