TET पर देशव्यापी संग्राम : दिल्ली रैली के बाद सरकार पर बढ़ा दबाव, लाखों शिक्षकों की “राहत या संकट” की घड़ी ! भाजपा नेताओं से टीएफआई प्रतिनिधिमंडल की मुलाकात, पुराने शिक्षकों को छूट देने की मांग तेज

YC न्यूज़ डेस्क । टीईटी (Teacher Eligibility Test) की अनिवार्यता को लेकर देशभर में उठ रहा विवाद अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचता नजर आ रहा है। 4 अप्रैल को रामलीला मैदान में हुई विशाल रैली के बाद शिक्षक संगठनों ने अपनी मांगों को और तेज कर दिया है। इसी कड़ी में टीएफआई (Teachers Federation of India) के प्रतिनिधिमंडल ने भाजपा के वरिष्ठ नेताओं Jagdambika Pal और Pankaj Chaudhary से मुलाकात कर अपनी मांगों को विस्तार से रखा। प्रतिनिधिमंडल ने विशेष रूप से उन शिक्षकों की स्थिति पर चिंता जताई, जिनकी नियुक्ति Right to Education Act लागू होने से पहले हुई थी। संगठन का कहना है कि उस समय टीईटी अनिवार्य नहीं था, इसलिए अब इन शिक्षकों को परीक्षा के लिए बाध्य करना न्यायसंगत नहीं है।

टीएफआई के अनुसार, देशभर में करीब 20 लाख शिक्षक इस नियम से प्रभावित हो सकते हैं, जिनमें बड़ी संख्या उत्तर प्रदेश से है। शिक्षकों का तर्क है कि इससे उनकी नौकरी की सुरक्षा और भविष्य दोनों खतरे में पड़ सकते हैं, साथ ही शिक्षा व्यवस्था पर भी असर पड़ेगा। बैठक में सुप्रीम कोर्ट के हालिया आदेश के प्रभावों पर भी चर्चा हुई। टीएफआई ने केंद्र सरकार से मांग की है कि इस मामले में हस्तक्षेप करते हुए ऐसा कानून बनाया जाए, जिससे पुराने शिक्षकों को टीईटी की अनिवार्यता से राहत मिल सके।

प्रतिनिधिमंडल में संजय सिंह और राधेरमण त्रिपाठी सहित कई पदाधिकारी शामिल रहे। नेताओं को बताया गया कि यदि जल्द समाधान नहीं निकला, तो लाखों शिक्षक असमंजस और असुरक्षा की स्थिति में आ जाएंगे। मुलाकात के बाद Pankaj Chaudhary ने भरोसा दिलाया कि इस मुद्दे पर शीर्ष नेतृत्व से चर्चा कर शिक्षकों के हित में समाधान निकालने का प्रयास किया जाएगा। वहीं, सहायक शिक्षक समग्र शिक्षक फेडरेशन के रविंद्र राठौर ने छत्तीसगढ़ सरकार से मांग की है कि अन्य राज्यों की तर्ज पर रिव्यू पिटीशन दायर कर शिक्षकों को राहत दिलाई जाए। फिलहाल, इस पूरे मुद्दे पर देशभर के लाखों शिक्षकों की नजर अब सरकार के अगले फैसले पर टिकी हुई है—जो उनके भविष्य की दिशा तय कर सकता है।

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