रायपुर ! होटल और ढाबों में परोसे जाने वाले ‘पनीर’ को लेकर बड़ा खुलासा सामने आया है। अब तक जिन व्यंजनों को लोग पनीर बटर मसाला या पनीर टिक्का समझकर खा रहे थे, उनमें से अधिकांश में असली दूध से बना पनीर नहीं, बल्कि स्किम्ड मिल्क पाउडर, फैट और सोयाबीन ऑयल से तैयार ‘एनालॉग’ इस्तेमाल हो रहा था। इस पर रोक लगाने के लिए राज्य का खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग जल्द ही सख्त आदेश जारी करने जा रहा है। नए निर्देशों के तहत यदि होटल या ढाबे में असली दूध से बना पनीर उपयोग नहीं किया जा रहा है, तो मेन्यू कार्ड में ‘पनीर’ शब्द लिखने की अनुमति नहीं होगी। इसके स्थान पर ‘एनालॉग बटर मसाला’, ‘एनालॉग टिक्का’ जैसे नाम लिखना अनिवार्य किया जाएगा। विभाग का मानना है कि आम उपभोक्ता पनीर और एनालॉग में अंतर नहीं कर पाते, जिससे उन्हें भ्रमित किया जा रहा है। खाद्य एवं औषधि प्रशासन के नियंत्रक दीपक अग्रवाल के अनुसार, केवल वही प्रतिष्ठान मेन्यू में ‘पनीर’ शब्द का उपयोग कर सकेंगे, जो दूध से बने असली पनीर का उपयोग कर रहे हैं। इस संबंध में भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण से चर्चा के बाद दिशा-निर्देश जारी करने की प्रक्रिया अंतिम चरण में है।
पनीर और एनालॉग में अंतर
विशेषज्ञों के अनुसार असली पनीर गाय या भैंस के दूध को फाड़कर तैयार किया जाता है, जबकि एनालॉग स्किम्ड मिल्क पाउडर, वनस्पति फैट और सोयाबीन ऑयल के मिश्रण से बनाया जाता है। देखने और स्वाद में समान होने के कारण उपभोक्ता आसानी से भ्रमित हो जाते हैं। नियमानुसार एनालॉग को खुले में पनीर की तरह बेचने की अनुमति नहीं है, बल्कि पैकिंग पर स्पष्ट रूप से ‘एनालॉग’ लिखना जरूरी होता है।
स्वास्थ्य पर असर को लेकर चिंता
मानकों के अनुसार तैयार एनालॉग सुरक्षित हो सकता है, लेकिन निर्धारित सीमा से अधिक फैट या अन्य तत्व होने पर यह स्वास्थ्य के लिए हानिकारक भी हो सकता है। इसी कारण विभाग पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए मेन्यू में स्पष्ट उल्लेख अनिवार्य करने जा रहा है।
रायपुर में नकली पनीर की बड़ी कार्रवाई
हाल ही में रायपुर के भाठागांव क्षेत्र में खाद्य विभाग ने छापा मारकर 1200 किलो नकली पनीर जब्त किया था। जांच में सामने आया कि पाम ऑयल, स्किम्ड मिल्क पाउडर और अन्य रसायनों से पनीर जैसा उत्पाद तैयार किया जा रहा था। इस कार्रवाई के बाद विभाग ने सख्ती बढ़ा दी है। खाद्य विभाग का कहना है कि यह कदम उपभोक्ताओं के अधिकारों की रक्षा और खाद्य पदार्थों में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होगा। जल्द जारी होने वाले आदेश के बाद होटल और ढाबों को अपने मेन्यू में बदलाव करना अनिवार्य होगा।