YC न्यूज़ डेस्क। केंद्र सरकार ने ‘वंदे मातरम्’ के संबंध में बुधवार सुबह नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। गृह मंत्रालय द्वारा जारी आदेश के अनुसार अब सभी सरकारी कार्यक्रमों, स्कूलों तथा महत्वपूर्ण आयोजनों में ‘वंदे मातरम्’ बजाना अनिवार्य होगा। गीत के दौरान सभी उपस्थित लोगों को राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ की तरह सम्मानपूर्वक खड़े रहना होगा। हालांकि सिनेमा हॉल में फिल्मों के दौरान यह नियम लागू नहीं होगा।नए निर्देशों के तहत अब प्रत्येक सरकारी आयोजन में सबसे पहले राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ होगा और उसके तुरंत बाद ‘वंदे मातरम्’ का वादन या गायन किया जाएगा। यह व्यवस्था सभी सरकारी आयोजनों और शैक्षणिक संस्थानों में अनिवार्य रूप से लागू रहेगी।
पद्म पुरस्कार और राष्ट्रपति कार्यक्रमों में भी अनिवार्यता
गृह मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि ‘वंदे मातरम्’ अब पद्म पुरस्कार जैसे नागरिक सम्मान समारोहों में भी अनिवार्य रूप से बजाया जाएगा। राष्ट्रपति और राज्यपालों के आगमन व प्रस्थान के अवसर पर, उनके संबोधन से पहले और बाद में भी इस गीत का वादन किया जाएगा। इसके अलावा तिरंगा फहराने के कार्यक्रमों में भी इस दिशा-निर्देश का पालन करना होगा। मंत्रालय ने कहा है कि गीत के वादन या गायन के समय सभी लोग सावधान मुद्रा में खड़े रहेंगे।
अब पूरे छह छंदों का वादन
इस निर्णय का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि अब ‘वंदे मातरम्’ के सभी छह छंद बजाए जाएंगे। बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा वर्ष 1875 में रचित यह गीत 1882 में उनके उपन्यास ‘आनंदमठ’ में प्रकाशित हुआ था। गीत के प्रारंभिक छंद भारत माता की वंदना करते हैं, जबकि बाद के छंदों में दुर्गा, कमला (लक्ष्मी) और सरस्वती जैसी देवियों का उल्लेख है।
गौरतलब है कि वर्ष 1937 में कांग्रेस के फैजपुर अधिवेशन में केवल पहले दो छंदों को सार्वजनिक कार्यक्रमों के लिए स्वीकृति दी गई थी। अब केंद्र सरकार ने सभी छह छंदों को पुनः लागू करने का निर्णय लिया है। बताया गया है कि छहों छंदों की कुल अवधि लगभग 3 मिनट 10 सेकंड होगी।