रायपुर। छत्तीसगढ़ में शासकीय कर्मचारियों के लिए एक बार फिर सख्त संदेश जारी किया गया है। सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) ने स्पष्ट किया है कि सरकारी नौकरी के साथ किसी भी प्रकार की “नेतागिरी” या राजनीतिक सक्रियता अब बिल्कुल बर्दाश्त नहीं की जाएगी। जारी निर्देश में सभी विभागों, संभागायुक्तों, कलेक्टरों और विभागाध्यक्षों को कहा गया है कि वे यह सुनिश्चित करें कि कर्मचारी पूरी निष्पक्षता, ईमानदारी और निष्ठा के साथ अपने कर्तव्यों का पालन करें। शासन ने दोहराया कि छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1965 का पालन हर हाल में अनिवार्य है।
🚫 राजनीतिक गतिविधियों पर सख्त रोक
आदेश के मुताबिक कोई भी शासकीय सेवक किसी राजनीतिक दल या संगठन का सदस्य नहीं बन सकता और न ही प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से किसी राजनीतिक गतिविधि में हिस्सा ले सकता है। इसके अलावा बिना सक्षम अनुमति के किसी भी संस्था, समिति या संगठन में पद धारण करना भी प्रतिबंधित किया गया है।
⚖️ अन्य जिम्मेदारियों पर भी नियंत्रण
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि कोई भी कर्मचारी ऐसा पद या जिम्मेदारी स्वीकार नहीं करेगा जिससे उसके सरकारी कार्यों की निष्पक्षता प्रभावित हो। चाहे वह शासकीय संस्था हो या निजी, बिना अनुमति भागीदारी नियमों का उल्लंघन मानी जाएगी।
🚨 उल्लंघन पर कड़ी कार्रवाई
यदि कोई कर्मचारी नियमों का उल्लंघन करता पाया जाता है, तो उसके खिलाफ छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम, 1966 के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी। इसमें निलंबन, वेतनवृद्धि रोकना सहित अन्य अनुशासनात्मक दंड शामिल हैं।
📢 प्रशासन का स्पष्ट संदेश
हाल के समय में कर्मचारियों की राजनीतिक गतिविधियों में संलिप्तता की शिकायतों के बाद सरकार ने यह कदम उठाया है। शासन ने साफ कर दिया है कि सेवा में रहते हुए निष्पक्षता सर्वोपरि है और किसी भी तरह की “नेतागिरी” अब स्वीकार्य नहीं होगी।