स्वेच्छानुदान” या “स्वार्थ अनुदान”? विधायक ईश्वर साहू पर रिश्तेदारों को लाभ पहुंचाने का आरोप

दुर्ग। मुख्यमंत्री स्वेच्छा अनुदान राशि के वितरण को लेकर भाजपा विधायक ईश्वर साहू विवादों के घेरे में आ गए हैं। कांग्रेस ने विधायक पर आरोप लगाया है कि उन्होंने जरूरतमंदों का हक छीनकर अपने परिवार और करीबियों को राहत राशि का लाभ दिलाया है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रही “रिश्तेदारों की रिलीफ लिस्ट” ने इस विवाद को और तूल दे दिया है। सूची में विधायक के निजी सहायक (PA), सुरक्षाकर्मी (PSO) और कार्यालय के कर्मचारियों से जुड़े रिश्तेदारों के नाम सामने आ रहे हैं, जिन्हें कथित रूप से बिना किसी पारदर्शी प्रक्रिया के अनुदान दिया गया।

कांग्रेस का आरोप: “सत्ता का दुरुपयोग कर अपनों को लाभ”

जिला कांग्रेस अध्यक्ष ने आरोप लगाते हुए कहा कि विधायक ईश्वर साहू ने अपने माता-पिता, रिश्तेदारों और नजदीकी लोगों को लाभ पहुंचाया है, जबकि वास्तविक जरूरतमंदों को दरकिनार कर दिया गया। यह भ्रष्टाचार का सीधा उदाहरण है। भाजपा शासन में पारदर्शिता सिर्फ एक दिखावा है।

विधायक की सफाई: “राजनीतिक साजिश है”

विवाद पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए विधायक ईश्वर साहू ने कहा कि मैंने अब तक लगभग 2000 जरूरतमंदों को स्वेच्छा अनुदान उपलब्ध कराने का प्रयास किया है। हम किसी की पार्टी या पहचान नहीं देखते। यह सब मेरे खिलाफ एक राजनीतिक साजिश है, क्योंकि मैं गरीब परिवार से हूं और विधायक बना हूं, जो कांग्रेस को रास नहीं आ रहा।

वायरल सूची में शामिल नाम:

PA दिग्विजय केशरी के परिवारजन

PSO ओम साहू के रिश्तेदार

कंप्यूटर ऑपरेटर धीरज पटेल से जुड़े संबंधी

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