
ध्वजारोहण विवाद ने लिया कानूनी मोड़, धमतरी न्यायालय पहुंचे कुरूद विधायक; पुराने भाजपा प्रशिक्षण कार्यक्रम के वीडियो को स्वतंत्रता दिवस से जोड़कर प्रसारित करने का आरोप
धमतरी। स्वतंत्रता दिवस पर ध्वजारोहण से जुड़े सोशल मीडिया वीडियो का विवाद अब न्यायालय की चौखट तक पहुंच गया है। कुरूद विधायक एवं पूर्व मंत्री अजय चंद्राकर ने कांग्रेस की राष्ट्रीय प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर नेहा सिंह राठौर के खिलाफ धमतरी न्यायालय में मानहानि संबंधी परिवाद प्रस्तुत किया है। मंगलवार 22 सितंबर को चंद्राकर न्यायालय पहुंचे, जहां उनके साथ बड़ी संख्या में भाजपा नेता एवं कार्यकर्ता भी मौजूद रहे। मामला उस वीडियो से जुड़ा है, जिसमें अजय चंद्राकर भाजपा का झंडा फहराते नजर आ रहे हैं। सोशल मीडिया पर इस वीडियो को 15 अगस्त 2026 के स्वतंत्रता दिवस समारोह से जोड़कर प्रसारित किए जाने का आरोप है। चंद्राकर का कहना है कि यह वीडियो स्वतंत्रता दिवस का नहीं, बल्कि कुरूद में आयोजित भाजपा के प्रशिक्षण कार्यक्रम का पुराना वीडियो है। उपलब्ध रिपोर्टों में प्रशिक्षण कार्यक्रम की तारीख मार्च 2026 बताई गई है, हालांकि अलग-अलग रिपोर्टों में इसकी सटीक तारीख अलग बताई गई है।
चंद्राकर का दावा—15 अगस्त को फहराया था तिरंगा
अजय चंद्राकर की ओर से कहा गया है कि 15 अगस्त को धमतरी के एकलव्य खेल मैदान में आयोजित जिला स्तरीय स्वतंत्रता दिवस समारोह में उन्होंने निर्धारित प्रोटोकॉल के तहत राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा फहराया था। उनका आरोप है कि पुराने वीडियो को अलग तारीख और संदर्भ के साथ सोशल मीडिया पर प्रसारित किए जाने से उनके संबंध में गलत धारणा बनी और सार्वजनिक प्रतिष्ठा प्रभावित हुई।
FIR के बाद अब मानहानि की कानूनी लड़ाई
इस विवाद को लेकर पहले पुलिस शिकायत और FIR की कार्रवाई की जानकारी सामने आ चुकी है। रिपोर्टों के अनुसार सुप्रिया श्रीनेत, नेहा सिंह राठौर और एक सोशल मीडिया अकाउंट के खिलाफ भी कार्रवाई की गई थी। अब अजय चंद्राकर की ओर से मानहानि संबंधी परिवाद प्रस्तुत किए जाने के बाद मामला न्यायिक प्रक्रिया के अगले चरण में पहुंच गया है।
अब कोर्ट में किन सवालों पर होगी नजर?
विवाद के केंद्र में अब वीडियो की वास्तविक तारीख, उसका मूल संदर्भ, सोशल मीडिया पर उसके प्रसारण का तरीका और उससे जुड़े डिजिटल साक्ष्य हैं। न्यायालय में प्रस्तुत दस्तावेजों और साक्ष्यों के आधार पर आगे की प्रक्रिया तय होगी। इस तरह 15 अगस्त के ध्वजारोहण से शुरू हुआ सोशल मीडिया विवाद अब FIR से आगे बढ़कर मानहानि की न्यायिक प्रक्रिया तक पहुंच चुका है। मामले में अदालत के समक्ष आने वाले दस्तावेज और दोनों पक्षों की दलीलें आगे की दिशा तय करेंगी।