
पंचायत सचिव संघ के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र कुमार साहू ने कहा—वर्ष 2026 में किए गए भरोसे को अमल में लाकर सचिवों को शासकीय कर्मचारी का दर्जा दिया जाये
दुर्ग, 10 सितंबर 2026। प्रदेश पंचायत सचिव संघ के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष एवं दुर्ग जिलाध्यक्ष महेंद्र कुमार साहू ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन 17 सितंबर 2026 के अवसर पर प्रदेश के पंचायत सचिवों को शासकीयकरण की सौगात देने की मांग की है। उन्होंने कहा कि पंचायत सचिवों को शासकीय कर्मचारी का दर्जा देते हुए नियुक्ति तिथि से गणना कर शासकीय कर्मचारियों की तरह सभी सुविधाएं प्रदान की जाएं।
महेंद्र कुमार साहू ने कहा कि प्रदेश के पंचायत सचिव पंचायत विभाग के कार्यों के साथ-साथ विभिन्न विभागों से जुड़े करीब 200 प्रकार के कार्यों का मैदानी स्तर पर निर्वहन करते हैं। प्रधानमंत्री आवास योजना, महतारी वंदन योजना, आयुष्मान भारत, पीएम किसान सम्मान निधि, सोलर योजना सहित ग्रामीण विकास से जुड़ी विभिन्न योजनाओं के क्रियान्वयन में पंचायत सचिवों की महत्वपूर्ण भूमिका है। उनके माध्यम से केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं का लाभ पात्र हितग्राहियों तक पहुंचाया जाता है।
‘मोदी की गारंटी’ में शामिल है शासकीयकरण की मांग
संघ के पदाधिकारी ने कहा कि पंचायत सचिवों का शासकीयकरण भाजपा के जनघोषणा पत्र और ‘मोदी की गारंटी’ में शामिल रहा है। इसमें 100 दिन के भीतर मांग के अनुरूप शासकीयकरण का आश्वासन दिए जाने की बात कही गई थी। इसी मांग को लेकर प्रदेश के पंचायत सचिवों ने 7 जुलाई 2024 को रायपुर के इनडोर स्टेडियम में पंचायत सचिव पदस्थापना दिवस एवं सम्मान समारोह आयोजित किया था, जिसमें बड़ी संख्या में पंचायत सचिव सहपरिवार शामिल हुए थे। उन्होंने बताया कि कार्यक्रम में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह, उपमुख्यमंत्री एवं पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री विजय शर्मा, महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े तथा भाजपा घोषणा पत्र समिति के संयोजक एवं सांसद दुर्ग विजय बघेल सहित जनप्रतिनिधि उपस्थित थे। संघ के अनुसार, इस दौरान मुख्यमंत्री ने पंचायत सचिवों के शासकीयकरण के लिए समिति गठित कर एक माह में मांग के अनुरूप मोदी के जन्मदिन पर पंचायत सचिवों को शासकीयकरण की सौगात देने की मांग, ‘मोदी की गारंटी’ पूरी करने उठी आवाज,महेंद्र कुमार साहू के अनुसार, बाद में प्रदेश अध्यक्ष उपेंद्र पैकरा के नेतृत्व में पंचायत सचिव संघ के प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री से मुलाकात कर शासकीयकरण की मांग पूरी करने का अनुरोध किया। संघ का कहना है कि उन्हें बजट 2025 में शासकीयकरण की सौगात मिलने का भरोसा दिलाया गया था, लेकिन बजट में मांग शामिल नहीं होने से पंचायत सचिवों में निराशा और आक्रोश की स्थिति बनी। इसके बाद प्रांतीय आह्वान पर पंचायत सचिवों ने अनिश्चितकालीन आंदोलन किया। आंदोलन के दौरान शासन-प्रशासन के साथ चर्चा का दौर चला। संघ के मुताबिक मुख्यमंत्री, पंचायत मंत्री और विभागीय अधिकारियों के साथ चर्चा में वर्ष 2026 में पंचायत सचिवों के शासकीयकरण तथा शासकीय कर्मचारियों की तरह सुविधाएं देने पर सहमति बनने के बाद आंदोलन स्थगित किया गया था।
अब भरोसे को अमल में लाने की मांग
महेंद्र कुमार साहू ने कहा कि पंचायत सचिवों को अब सरकार के भरोसे और ‘मोदी की गारंटी’ के अनुरूप शासकीयकरण की सौगात का इंतजार है। उन्होंने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग से मांग की कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन 17 सितंबर के अवसर पर प्रदेश के पंचायत सचिवों को शासकीय कर्मचारी का दर्जा देने की घोषणा की जाए और नियुक्ति तिथि से शासकीय कर्मचारियों के अनुरूप सुविधाएं प्रदान की जाएं। उन्होंने कहा कि पंचायत सचिव लंबे समय से ग्रामीण प्रशासन और शासन की योजनाओं के क्रियान्वयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। ऐसे में सरकार को पूर्व में दिए गए भरोसे को पूरा करते हुए शासकीयकरण की मांग पर ठोस निर्णय लेना चाहिए।