BSP में VRS और छंटनी की चर्चाओं पर सांसद विजय बघेल चिंतित, बोले— “भ्रम और डर के माहौल में नहीं बढ़ सकता उत्पादन,भिलाई इस्पात संयंत्र प्रबंधन से मांगी स्पष्ट नीति

BSP में VRS और छंटनी की चर्चाओं पर सांसद विजय बघेल चिंतित, बोले— “भ्रम और डर के माहौल में नहीं बढ़ सकता उत्पादन,भिलाई इस्पात संयंत्र प्रबंधन से मांगी स्पष्ट नीति

भिलाई। भिलाई इस्पात संयत्र में संभावित स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS), अनिवार्य रिटायरमेंट और कर्मचारियों की संभावित छंटनी को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच Vijay Baghel का बड़ा बयान सामने आया है। सांसद ने संयंत्र प्रबंधन की ओर से अब तक कोई स्पष्ट स्थिति सार्वजनिक नहीं किए जाने पर चिंता जताते हुए कहा कि इससे कर्मचारियों और अधिकारियों के बीच भ्रम, असुरक्षा और असमंजस का माहौल बन रहा है। सांसद विजय बघेल ने कहा कि भिलाई इस्पात संयंत्र केवल एक औद्योगिक इकाई नहीं, बल्कि देश की औद्योगिक पहचान और प्रगति का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि संयंत्र को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने में यहां के लाखों कर्मियों और अधिकारियों का वर्षों का परिश्रम, समर्पण और त्याग शामिल है। ऐसे में उनके भविष्य को लेकर अनिश्चितता का माहौल बनना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।

उन्होंने कहा कि पिछले कुछ समय से संयंत्र में स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति, अनिवार्य रिटायरमेंट और 33 प्रतिशत तक संभावित छंटनी जैसी चर्चाएं लगातार सामने आ रही हैं, लेकिन प्रबंधन की ओर से कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण नहीं दिया गया है। इससे कर्मचारियों के मनोबल पर नकारात्मक असर पड़ रहा है। सांसद ने कहा कि वर्तमान में संयंत्र के अधिकांश नियमित कर्मियों की सेवा अवधि में केवल तीन से चार वर्ष का समय शेष है। वहीं दूसरी ओर संयंत्र की उत्पादन क्षमता को 7.5 मिलियन टन से बढ़ाकर 10.5 मिलियन टन करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। ऐसे संक्रमणकालीन दौर में यदि कर्मचारियों के भविष्य को लेकर असमंजस बना रहेगा, तो इसका सीधा असर उत्पादन क्षमता और कार्य गुणवत्ता पर पड़ेगा।

उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी उद्योग की सफलता उसके मानव संसाधन के विश्वास, उत्साह और स्थिरता पर निर्भर करती है। भय और अनिश्चितता का वातावरण बनाकर किसी भी संस्थान को आगे नहीं बढ़ाया जा सकता। सांसद विजय बघेल ने BSP टाउनशिप की बदहाल सुविधाओं पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि केवल ठेका श्रमिक ही नहीं, बल्कि नियमित कर्मचारी और अधिकारी भी कई मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं। टाउनशिप में स्वच्छता, पेयजल, सड़क, स्वास्थ्य सेवाओं और नागरिक सुविधाओं में तत्काल सुधार की जरूरत है। उन्होंने संयंत्र प्रबंधन से मांग की कि वह कर्मचारियों और अधिकारियों के हितों से जुड़े सभी मुद्दों पर तत्काल पारदर्शी और स्पष्ट नीति सार्वजनिक करे, ताकि भ्रम की स्थिति समाप्त हो सके। सांसद ने कहा कि संवाद, पारदर्शिता और विश्वास ही किसी भी बड़े संगठन की सफलता का आधार होते हैं। सांसद बघेल ने कर्मचारियों को भरोसा दिलाया कि यदि उनके हितों को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की गई तो वे जनप्रतिनिधि के रूप में उनके साथ मजबूती से खड़े रहेंगे और हर मंच पर उनकी आवाज उठाएंगे।

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