रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र के तीसरे दिन एक दुर्लभ और सकारात्मक दृश्य सामने आया जब बिजली दरों में बढ़ोतरी को लेकर विपक्ष ने स्थगन प्रस्ताव प्रस्तुत किया, जिसे अस्वीकार कर दिया गया। बावजूद इसके, नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय द्वारा विषय को गंभीरता से लेने और पारदर्शिता के साथ जवाब देने के लिए सरकार का आभार जताया। उनके इस रुख का स्वागत सत्ता पक्ष के सदस्यों ने मेजें थपथपाकर किया, जिससे सदन में परिपक्व संवाद और गरिमा की मिसाल कायम हुई।
विधानसभा अध्यक्ष ने जानकारी दी कि इस विषय को लेकर 33 विधायकों की ओर से स्थगन सूचना प्राप्त हुई थी, लेकिन उसे मंजूरी नहीं दी गई। इसके बावजूद विपक्ष ने शांतिपूर्ण और गरिमामय तरीके से विषय की गंभीरता को रखते हुए अपनी बात सदन के सामने रखी। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने स्पष्ट किया कि वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए बिजली दरों में केवल 1.89 प्रतिशत की मामूली वृद्धि की गई है, जो कि विगत वर्षों की तुलना में सबसे न्यूनतम है। उन्होंने कहा कि यह निर्णय व्यापक जनसुनवाई, सभी पक्षों की भागीदारी और पूरी पारदर्शिता के साथ लिया गया है।
मुख्यमंत्री ने सदन को यह भरोसा भी दिलाया कि कृषकों पर इस वृद्धि का कोई अतिरिक्त भार नहीं पड़ेगा। कृषि पंपों पर 50 पैसे प्रति यूनिट की दर वृद्धि का वहन राज्य शासन द्वारा सब्सिडी के रूप में किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि घरेलू उपभोक्ताओं के लिए मात्र 10 से 20 पैसे प्रति यूनिट की वृद्धि की गई है, वहीं स्टील और रोलिंग मिल जैसे ऊर्जा-गहन उद्योगों की दरों में कटौती की गई है। उन्होंने कहा कि यह निर्णय राज्य सरकार की उद्योग-हितैषी नीति को दर्शाता है।
मुख्यमंत्री ने ऊर्जा आपूर्ति की स्थिति पर संतोष व्यक्त करते हुए कहा कि शहरी क्षेत्रों को औसतन 23.85 घंटे प्रतिदिन, ग्रामीण क्षेत्रों को 23.45 घंटे और कृषि फीडरों को 18 घंटे प्रतिदिन बिजली आपूर्ति दी जा रही है, जो कि देश में सर्वाधिक है। उन्होंने बताया कि तकनीकी और वाणिज्यिक हानियों (AT&C लॉस) को 2020-21 में 23.14 प्रतिशत से घटाकर 2024-25 में 13.79 प्रतिशत पर लाया गया है, जो ऊर्जा वितरण प्रणाली की दक्षता और पारदर्शिता को दर्शाता है।
ऊर्जा अधोसंरचना के क्षेत्र में हुए निवेश की जानकारी देते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि कोरबा में 1320 मेगावाट की क्षमता वाले विद्युत संयंत्र की स्थापना प्रारंभ हो चुकी है, जिसकी लागत 15,800 करोड़ रुपये है। इसके अतिरिक्त ट्रांसमिशन कंपनी में 2433 करोड़, डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी में 3977 करोड़ और जनरेशन कंपनी में 2992 करोड़ रुपये का निवेश किया जा रहा है। यह राज्य की ऊर्जा अधोसंरचना को नई ऊंचाई देने की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण कदम है।
सौर ऊर्जा के क्षेत्र में राज्य सरकार ने ‘प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना’ के तहत नई क्रांति की शुरुआत की है। योजना के अंतर्गत 3 किलोवाट तक के सोलर संयंत्रों पर 78,000 रुपये की केंद्र सरकार से और 2 किलोवाट तक के संयंत्रों पर 30,000 रुपये की राज्य सरकार से सब्सिडी दी जा रही है। इससे घरेलू उपभोक्ताओं को ऊर्जा आत्मनिर्भर बनने में सहायता मिलेगी।
मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि राज्य सरकार एवं पावर कंपनियों द्वारा अब तक 3 लाख करोड़ रुपये से अधिक के करार किए जा चुके हैं। इससे न केवल ऊर्जा उत्पादन में वृद्धि होगी बल्कि बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर भी सृजित होंगे। विधानसभा के मानसून सत्र के तीसरे दिन विपक्ष और सत्ता पक्ष दोनों ने सदन में परिपक्वता और उत्तरदायित्व का परिचय देते हुए लोकतंत्र की एक अनुकरणीय मिसाल प्रस्तुत की।