मेडिकल कॉलेजों में शुरू होंगे पैरामेडिकल कोर्स, बस्तर में 99% हेल्थ स्क्रीनिंग का दावा

मेडिकल कॉलेजों में शुरू होंगे पैरामेडिकल कोर्स, बस्तर में 99% हेल्थ स्क्रीनिंग का दावा

रायपुर, 30 जुलाई। छत्तीसगढ़ सरकार ने स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार और चिकित्सा शिक्षा को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए प्रदेश के सभी 10 मेडिकल कॉलेजों में पैरामेडिकल पाठ्यक्रम शुरू करने की घोषणा की है। स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने गुरुवार को स्वास्थ्य विभाग की उपलब्धियों और आगामी योजनाओं की जानकारी देते हुए यह घोषणा की। प्रेस वार्ता के दौरान मंत्री ने दावा किया कि राज्य सरकार दूरस्थ और संवेदनशील क्षेत्रों तक गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने के लिए लगातार काम कर रही है। उन्होंने मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान को इस दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताते हुए कहा कि इसके सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं।

बस्तर में 34.29 लाख लोगों की स्क्रीनिंग

स्वास्थ्य मंत्री के अनुसार अभियान के तहत 34.29 लाख से अधिक लोगों का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया, जो लक्षित आबादी का लगभग 99 प्रतिशत है। उन्होंने बताया कि इस दौरान मलेरिया, टीबी, सिकल सेल, कुष्ठ रोग और मुख कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों की समय रहते पहचान कर उपचार शुरू किया गया। मंत्री ने कहा कि 60 हजार से अधिक गंभीर मरीजों को उच्च स्वास्थ्य संस्थानों में रेफर किया गया, जबकि 10,938 हाई-रिस्क गर्भवती महिलाओं की विशेष निगरानी और उपचार सुनिश्चित किया गया।

सभी मेडिकल कॉलेजों में पैरामेडिकल पाठ्यक्रम

स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि प्रदेश के सभी 10 मेडिकल कॉलेजों में पैरामेडिकल कोर्स शुरू होने से स्वास्थ्य संस्थानों को प्रशिक्षित तकनीकी और पैरामेडिकल स्टाफ उपलब्ध होगा। साथ ही युवाओं के लिए स्वास्थ्य क्षेत्र में रोजगार और प्रशिक्षण के नए अवसर पैदा होंगे।

1051 स्वास्थ्य संस्थानों में आधुनिक जांच सुविधा

उन्होंने बताया कि राज्य के 1,051 स्वास्थ्य संस्थानों में आधुनिक पैथोलॉजी जांच सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। हब एंड स्पोक मॉडल तथा आईटी आधारित रिपोर्टिंग सिस्टम के माध्यम से दूरस्थ क्षेत्रों तक भी समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण जांच सुविधाएं पहुंचाई जा रही हैं।

375 नई 108 एम्बुलेंस, 6.50 लाख लोगों को मदद

आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए प्रदेश में 375 नई 108 संजीवनी एक्सप्रेस एम्बुलेंस संचालित की गई हैं। जनवरी 2024 से जून 2026 के बीच 6.50 लाख से अधिक लोगों को आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई गईं।

मलेरिया नियंत्रण में सफलता का दावा

मंत्री ने दावा किया कि रणनीतिक कार्ययोजना और लगातार निगरानी के कारण बस्तर संभाग की मलेरिया पॉजिटिविटी दर 4.60 प्रतिशत से घटकर 0.48 प्रतिशत रह गई है। वहीं प्रदेश का वार्षिक परजीवी सूचकांक (API) 5.21 से घटकर 0.90 तक पहुंच गया है। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य मलेरिया से एक भी मौत नहीं होने देना है।

11.89 लाख संस्थागत प्रसव

उन्होंने बताया कि पिछले ढाई वर्षों में प्रदेश में 11.89 लाख से अधिक संस्थागत प्रसव कराए गए हैं। प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के तहत गर्भवती महिलाओं की नियमित विशेषज्ञ जांच, हाई-रिस्क गर्भावस्था की पहचान और आवश्यक उपचार सुनिश्चित किया जा रहा है।

एनालॉग पनीर पर सख्ती

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान स्वास्थ्य मंत्री ने एनालॉग पनीर के उपयोग और बिक्री पर प्रभावी प्रतिबंध सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि खाद्य सुरक्षा मानकों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

सवालों के जवाब नहीं देने पर घिरे अधिकारी

प्रेस वार्ता के दौरान स्वास्थ्य सचिव और अन्य अधिकारियों से मीडिया ने कार्रवाई, शिकायतों के निस्तारण और विभागीय जवाबदेही से जुड़े कई सवाल पूछे। सवालों के संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर प्रश्न उठाए गए। कुछ पत्रकारों ने शिकायतों और कार्रवाई से जुड़े मामलों में व्यक्ति विशेष की जवाबदेही तय करने की मांग भी उठाई। इस पर स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने अधिकारियों को अधिक सक्रिय और जवाबदेह रहने के निर्देश देते हुए कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े मामलों में पारदर्शिता और त्वरित प्रतिक्रिया सुनिश्चित की जानी चाहिए।

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