
( दिशा कमेटी की बैठक में सांसद विजय बघेल के निर्देश के बावजूद जांच आगे नही बढ़ी )
पाटन /जामगांव आर । पाटन ब्लॉक के बहुचर्चित मनरेगा प्लांटेशन मामले का खुलासा हुए लगभग तीन महीने बीत चुके हैं, लेकिन जिला प्रशासन और संबंधित विभागों की ओर से अब तक किसी ठोस कार्रवाई की जानकारी सामने नहीं आई है। करोड़ों रुपये की लागत से किए गए पौधारोपण में अनियमितताओं, सूखे पौधों, गायब ट्री गार्ड और भुगतान प्रक्रिया पर उठे सवाल आज भी अनुत्तरित हैं। युवा चैनल में लगातार खबरें आने , ग्रामीणों की शिकायतों और जनप्रतिनिधियों द्वारा निष्पक्ष जांच की मांग उठाए जाने के बावजूद न तो किसी अधिकारी की जवाबदेही तय हुई है और न ही किसी प्रकार की रिकवरी या अनुशासनात्मक कार्रवाई की घोषणा की गई है। इससे प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं। जानकारी के अनुसार जिला सतर्कता एवं निगरानी समिति, दुर्ग की बैठक में सांसद विजय बघेल ने मामले की निष्पक्ष जांच कराने के निर्देश दिए थे। इसके बाद जिला पंचायत दुर्ग को जांच सौंपी गई और डिप्टी कलेक्टर उत्तम ध्रुव को जांच अधिकारी बनाए जाने की जानकारी सामने आई थी। हालांकि अब तक जांच रिपोर्ट या कार्रवाई की स्थिति सार्वजनिक नहीं हो सकी है। उद्यानिकी विभाग के उपसंचालक लावतारे के मुताबिक विभाग इसमें केवल टेक्निकल एजेंसी थी सारा काम जिला पंचायत की देखरेख में हुआ था।
2.38 करोड़ की योजना, लेकिन जमीन पर सवाल-
गौरतलब हैं कि वर्ष 2024-25 में पाटन ब्लॉक के बेल्हारी, टेमरी, धमना, सोनपुर, तरीघाट, केसरा और सिकोला आदि गांवों में जिला पंचायत दुर्ग द्वारा मनरेगा के तहत लगभग 2 करोड़ 38 लाख रुपये की लागत से पौधारोपण कार्य स्वीकृत किया गया था। इसमें कार्य एजेंसी उद्यानिकी विभाग के माध्यम से पौधे लगाने, ट्री गार्ड लगाने और मजदूरी भुगतान का दावा किया गया, लेकिन स्थानीय स्तर पर अधिकांश पौधों के सूख जाने और व्यवस्थाओं में कमी के आरोप लगाए गए। ग्रामीणों का कहना है कि यदि करोड़ों रुपये खर्च होने के बाद 90 से 95 प्रतिशत पौधे नष्ट हो गए हैं, तो इसकी जिम्मेदारी तय होना आवश्यक है। उनका आरोप है कि अब तक जांच और कार्रवाई की दिशा में अपेक्षित प्रगति नहीं दिखी है।
क्या फाइलों में दब गया मामला?
स्थानीय लोगों का कहना है कि मामला सामने आने के बाद शुरुआती स्तर पर हलचल जरूर हुई, लेकिन समय बीतने के साथ पूरा प्रकरण ठंडे बस्ते में चला गया। उनका सवाल है कि यदि आरोप निराधार थे तो प्रशासन को जांच पूरी कर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए और यदि आरोप सही हैं तो दोषियों के खिलाफ कार्रवाई अब तक क्यों नहीं हुई। ग्रामीणों ने पूरे प्लांटेशन कार्य की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच सहित सभी भुगतान और मस्टररोल की तकनीकी व वित्तीय जांच की मांग करते हुए कहा हैं कि दोषी अधिकारियों, कर्मचारियों और संबंधित एजेंसियों की जिम्मेदारी तय की जाए एवं अनियमितता सिद्ध होने पर सरकारी राशि की रिकवरी की जाए।
• अब सबसे बड़ा सवाल…
लगातार मीडिया रिपोर्ट, जनप्रतिनिधियों की मांग और ग्रामीणों की शिकायतों के बावजूद यदि प्रशासन अब भी खामोश है, तो करोड़ों रुपये की इस हरियाली योजना की जांच आखिर कब पूरी होगी? क्या दोषियों पर कार्रवाई होगी या यह मामला भी सरकारी फाइलों में दबकर रह जाएगा?
• डिप्टी कलेक्टर ने बताई जांच में देरी की वजह
मामले में डिप्टी कलेक्टर उत्तम ध्रुव ने बताया कि जिला पंचायत की ओर से इस मामले की जांच के लिए कहा गया था हालांकि, अब तक जांच से संबंधित पूरी फाइल मेरे पास प्राप्त नहीं हुई है। फाइल और सभी आवश्यक दस्तावेज मिलने के बाद नियमानुसार जांच की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।