पाटन में मनरेगा और डीएमएफ से हुए कार्यों का डेढ़ साल से भुगतान लंबित ! — ‘सुशासन’ के दावों पर प्रशासन की उदासीनता भारी, पूर्व सरपंचों ने दी आंदोलन की चेतावनी

पाटन में मनरेगा और डीएमएफ से हुए कार्यों का डेढ़ साल से भुगतान लंबित ! — ‘सुशासन’ के दावों पर प्रशासन की उदासीनता भारी, पूर्व सरपंचों ने दी आंदोलन की चेतावनी

जामगांव आर। पाटन ब्लॉक के ग्रामीण इलाकों में मनरेगा और जिला खनिज न्यास (DMF) मद से स्वीकृत कार्यों का भुगतान डेढ़ साल से लंबित है। इस प्रशासनिक लापरवाही ने अब ग्रामवासियों और जनप्रतिनिधियों के सब्र का बांध तोड़ दिया है। जानकारी के मुताबिक वर्ष 2024 में स्वीकृत कार्यों — जिनमें नाली, पुलिया, शमशान शेड और पहुँच मार्ग निर्माण शामिल हैं — को तत्कालीन सरपंचों ने समय पर पूरा कर दिया था। लेकिन आज तक डीएमएफ मद का भुगतान तक नहीं हुआ।इन कार्यों के लिए मनरेगा मद से 1.04 करोड़ रुपये और DMF मद से 65.49 लाख रुपये की स्वीकृति दी गई थी। ब्लॉक के सेलूद, टेमरी, धमना, रानीतराई, बेल्हारी, औंरी, कोपेडीह, किकिरमेटा, धौराभठा, खोला, परसाही और खम्हरिया जैसे ग्रामों में यह समस्या समान रूप से बनी हुई है। पूर्व सरपंच खेमलाल देशलहरे, जितेश्वरी साहू, नेतराम निषाद और उषा महलवार ने जिला प्रशासन की निष्क्रियता पर सवाल उठाते हुए कहा कि हमने जनपद पंचायत, कलेक्टर जन दर्शन और सुशासन तिहार तक में आवेदन दिए, लेकिन प्रशासन ने जवाब देना भी जरूरी नहीं समझा।

◆ सरकार के सुशासन के दावे पर सवाल —
ग्राम पंचायत बेल्हारी के उपसरपंच मनीष चंद्राकर और जनपद सभापति खेमलाल देशलहरे ने कहा कि दुर्ग जिला में स्वयं उपमुख्यमंत्री जिले के प्रभारी मंत्री है बावजूद जिले में अफसरशाही अपने चरम पर है। उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर पखवाड़े भर में लंबित भुगतान के सम्बंध में संतोषजनक कार्यवाही नहीं हुई, तो हम जनपद पंचायत के सामने आंदोलन करेंगे और जरूरत पड़ी तो न्यायालय की शरण लेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि जिला प्रशासन की यह लापरवाही सरकार के सुशासन और पारदर्शिता के दावों को झूठा साबित करती है।

भुगतान का वादा अधूरा, जवाब वही पुराना — इस संबंध में जब जनपद सीईओ जागेन्द्र साहू से बात की गई तो उन्होंने बताया कि भुगतान के लिए उच्च कार्यालय को अवगत कराया गया है, राशि प्राप्त होते ही भुगतान कर दिया जाएगा। हालांकि ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों का कहना है कि यह जवाब पिछले कई महीनों से दिया जा रहा है, लेकिन अब तक हकीकत नहीं बदली।

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