नशामुक्ति का संकल्प: शराब पीने पर 3500, बनाने-बेचने पर 35 हजार जुर्माना; सूचना देने वाले को 5 हजार इनाम

नशामुक्ति का संकल्प: शराब पीने पर 3500, बनाने-बेचने पर 35 हजार जुर्माना; सूचना देने वाले को 5 हजार इनाम

बालोद। बालोद जिले के वनांचल क्षेत्र स्थित ग्राम पंचायत मरकाटोला के आश्रित ग्राम सुरडोंगर ने नशामुक्त गांव बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। ग्राम सभा में सर्वसम्मति से शराब, गांजा और अन्य नशीले पदार्थों के सेवन, निर्माण और बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने का निर्णय लिया गया है। नियमों का उल्लंघन करने वालों पर भारी जुर्माना लगाने का भी प्रावधान किया गया है। उप सरपंच किशोर कुमार साहू ने बताया कि ग्राम सभा में तय किए गए नियमों के अनुसार यदि कोई व्यक्ति घर में शराब या अन्य नशीला पदार्थ लेते हुए पकड़ा जाता है तो उस पर 3500 रुपए का जुर्माना लगाया जाएगा। वहीं शराब या नशीला पदार्थ बनाने पर 35 हजार रुपए का जुर्माना देना होगा। गांव में नशीले पदार्थों की बिक्री करने वालों के खिलाफ भी कठोर कार्रवाई की जाएगी।

सूचना देने वाले को मिलेगा 5 हजार का गुप्त इनाम

ग्रामीणों ने अवैध शराब और नशीले पदार्थों की गतिविधियों पर रोक लगाने के लिए एक और महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। ऐसे मामलों की गोपनीय सूचना देने वाले व्यक्ति को 5 हजार रुपए का इनाम दिया जाएगा। ग्राम सभा का मानना है कि इससे गांव में अवैध कारोबार पर प्रभावी नियंत्रण लगाने में मदद मिलेगी।

नशे से बढ़ रहे थे विवाद और मारपीट

उप सरपंच किशोर कुमार साहू ने बताया कि गांव में लंबे समय से शराब और नशे की वजह से पारिवारिक विवाद, मारपीट और सामाजिक तनाव की घटनाएं बढ़ रही थीं। इसका सबसे अधिक असर महिलाओं और बच्चों पर पड़ रहा था। साथ ही युवाओं का भविष्य भी प्रभावित हो रहा था।

पहले समझाइश, फिर सख्त नियम

ग्रामीणों के अनुसार, नशे से दूर रहने के लिए पहले लोगों को समझाने और जागरूक करने का प्रयास किया गया था, लेकिन अपेक्षित सुधार नहीं हुआ। इसके बाद ग्राम सभा में सभी ग्रामीणों की सहमति से नशे पर पूर्ण प्रतिबंध और जुर्माने के नियम लागू करने का निर्णय लिया गया। ग्रामीणों ने स्पष्ट किया कि इस पहल का उद्देश्य केवल जुर्माना वसूलना नहीं, बल्कि गांव को शांत, सुरक्षित और नशामुक्त बनाना है।

प्रशासन को भेजी गई निर्णय की प्रति

ग्राम सभा में पारित प्रस्ताव की प्रति एसडीएम, तहसीलदार, जनपद पंचायत सीईओ और थाना प्रभारी को भी सौंप दी गई है। इसके अलावा गांव के प्रमुख स्थानों पर नशा प्रतिबंधित क्षेत्र होने की जानकारी देने वाले बोर्ड लगाए गए हैं, ताकि सभी ग्रामीणों और बाहरी लोगों को नियमों की जानकारी मिल सके।

महिलाओं और बच्चों को मिलेगी राहत

ग्रामीण सोमेश कुमार मरकाम ने कहा कि नशे पर रोक लगने से लोगों की मेहनत की कमाई बचेगी और गांव का सामाजिक वातावरण बेहतर होगा। वहीं शिक्षक संजय कुमार बारले ने बताया कि शराब के कारण सबसे ज्यादा परेशानियां महिलाओं और बच्चों को उठानी पड़ती थीं। ग्राम सभा के इस फैसले से गांव में शांति, सुरक्षा और सामाजिक समरसता बढ़ने की उम्मीद है।

दूसरे गांवों के लिए बनी मिसाल

सुरडोंगर की इस सामूहिक पहल की चर्चा आसपास के वनांचल क्षेत्रों में भी हो रही है। ग्रामीणों का कहना है कि निर्णय के बाद गांव में नशे के खिलाफ जागरूकता बढ़ी है और कई अन्य गांव भी इसी तरह सामूहिक निर्णय लेकर नशामुक्ति अभियान शुरू करने पर विचार कर रहे हैं। ग्रामीणों को उम्मीद है कि सामूहिक सहभागिता और सामाजिक अनुशासन के बल पर सुरडोंगर आने वाले समय में पूरी तरह नशामुक्त गांव के रूप में पहचान बना सकेगा।

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