नई दिल्ली/रायपुर, 8 अगस्त 2026। छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता भूपेश बघेल को सुप्रीम कोर्ट से झटका लगा है। शीर्ष अदालत ने 2023 के विधानसभा चुनाव में उनकी जीत को चुनौती देने वाली चुनाव याचिका को शुरुआती स्तर पर ही खारिज करने की मांग वाली उनकी याचिका को अस्वीकार कर दिया है। हालांकि, कोर्ट ने स्पष्ट किया कि चुनाव याचिका के ट्रायल के दौरान भूपेश बघेल अपनी सभी कानूनी और तथ्यात्मक आपत्तियां उठाने के लिए स्वतंत्र होंगे। मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने की। चुनाव याचिका भाजपा नेता और दुर्ग लोकसभा सांसद विजय बघेल ने दायर की है।
क्या है पूरा मामला?
विजय बघेल की ओर से दायर चुनाव याचिका में आरोप लगाया गया है कि वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव में मतदान से 48 घंटे पहले लागू साइलेंस पीरियड के दौरान भूपेश बघेल ने रोड शो किया था। याचिका में इसे जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 126 का उल्लंघन बताया गया है।
भूपेश बघेल की ओर से क्या दलील दी गई?
भूपेश बघेल की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने सुप्रीम कोर्ट में दलील दी कि आरोपों को सही मान भी लिया जाए तो यह अधिकतम धारा 126 के तहत चुनावी अपराध हो सकता है, लेकिन इसे धारा 123 के तहत भ्रष्ट आचरण नहीं माना जा सकता। उन्होंने यह भी तर्क दिया कि कथित रोड शो का चुनाव परिणाम पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा, क्योंकि भूपेश बघेल ने करीब 20 हजार मतों के अंतर से चुनाव जीता था। दलील के दौरान यह भी बताया गया कि रोड शो में लगभग 200 लोग शामिल थे और उस समय भूपेश बघेल मुख्यमंत्री होने के कारण उन्हें Z+ सुरक्षा प्राप्त थी।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची ने कहा कि कथित उल्लंघन का चुनाव परिणाम पर वास्तविक प्रभाव पड़ा या नहीं, यह तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर तय किया जाएगा। इसलिए इस स्तर पर चुनाव याचिका को खारिज नहीं किया जा सकता।
सुप्रीम कोर्ट ने भूपेश बघेल की याचिका खारिज करते हुए चुनाव याचिका पर आगे की न्यायिक प्रक्रिया का रास्ता साफ कर दिया। साथ ही अदालत ने स्पष्ट किया कि ट्रायल के दौरान भूपेश बघेल अपनी सभी कानूनी एवं तथ्यात्मक आपत्तियां रखने के लिए स्वतंत्र हैं। अब मामले में चुनाव याचिका की सुनवाई आगे जारी रहेगी और कथित रोड शो, साइलेंस पीरियड के उल्लंघन तथा उसके चुनाव परिणाम पर प्रभाव जैसे मुद्दों का परीक्षण तथ्यों एवं साक्ष्यों के आधार पर किया जाएगा।