रायपुर | छत्तीसगढ़ पुलिस मुख्यालय ने राज्य की इमरजेंसी सर्विस डायल-112 के संचालन के लिए नए सिरे से टेंडर जारी किया है। इस बार टेंडर की शर्तों में बड़ा बदलाव किया गया है — अब केवल लिमिटेड और प्राइवेट लिमिटेड कंपनियों के साथ-साथ सोसायटी को भी भागीदारी का मौका दिया गया है। इस बदलाव के चलते टेंडर प्रक्रिया विवादों में आ गई है।
पुलिस मुख्यालय ने इस टेंडर के तहत 400 से अधिक इमरजेंसी गाड़ियों के संचालन की जिम्मेदारी सौंपी जानी है। आधा दर्जन से ज्यादा कंपनियां टेंडर में शामिल हुई हैं और इनका प्री-बिड भी पूरा हो चुका है। टेंडर की अंतिम तिथि 29 अक्टूबर तय की गई है, जिसके बाद दो माह में प्रक्रिया पूरी कर किसी एक कंपनी को ठेका सौंपा जाएगा।
◆शर्तों में बदलाव से उठा विवाद
सूत्रों के अनुसार, डायल-112 की शुरुआत के समय (वर्ष 2018) जो टेंडर शर्तें तय की गई थीं, उनमें केवल निजी और लिमिटेड कंपनियों को ही भागीदारी की अनुमति थी। लेकिन इस बार एक नया प्रावधान जोड़ते हुए सोसायटी को भी शामिल कर लिया गया है। यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि किस प्रकार की सोसायटी पात्र होगी, जिससे यह चर्चा तेज हो गई है कि यह बदलाव किसी विशेष कंपनी को लाभ पहुंचाने के लिए किया गया है। नए नियम के तहत ट्रक, बस या मालवाहक वाहनों का संचालन करने वाली कंपनियां भी अब डायल-112 सेवा चलाने के लिए पात्र हो गई हैं।
◆ 400 नई गाड़ियां फिलहाल निष्क्रिय
पुलिस मुख्यालय ने हाल ही में 400 नई गाड़ियां खरीदी हैं, जो फिलहाल अमलेश्वर बटालियन में खड़ी हैं। हर वाहन की कीमत लगभग 15 लाख रुपये बताई जा रही है। फिलहाल एबीपी कंपनी का अनुबंध जनवरी तक बढ़ा दिया गया है, इसलिए नई गाड़ियां फरवरी से पहले सड़कों पर नहीं उतरेंगी।
◆ टेंडर में शामिल कंपनियां
टेंडर में जीवीके, जय अंबे, सम्मान फाउंडेशन, कैम्प, बीवॉयजी, विजन प्लस और एबीपी कंपनी जैसी संस्थाएं शामिल हैं। इनमें से जीवीके और जय अंबे पहले भी राज्य में 108 एंबुलेंस सेवा का संचालन कर चुकी हैं। वहीं कैम्प फिलहाल नि:शुल्क शव वाहन सेवा चला रही है।
◆एमपी और सी-डैक का मॉडल बना आधार
जानकारी के अनुसार, मध्य प्रदेश में डायल-112 सेवा का संचालन एक सोसायटी के माध्यम से किया जा रहा है। वहीं, छत्तीसगढ़ में अब तक टाटा कंपनी अनुबंध पर सेवा चला रही थी। अनुबंध समाप्त होने के बाद अब आईटी संचालन की जिम्मेदारी सी-डैक (C-DAC) को दी गई है, जो स्वयं एक सोसायटी है।
◆टेंडर के नए नियम एक नजर में
सोसायटी को भी भागीदारी की अनुमति, पर पात्रता स्पष्ट नहीं। पिछले तीन वर्षों का बैक-टू-बैक अनुभव जरूरी। टेंडर में कहीं भी “इमरजेंसी वाहन” या “डायल-112” का सीधा उल्लेख नहीं। बीते तीन वर्षों में फील्ड सर्विस का कम से कम 75 करोड़ का टर्नओवर अनिवार्य। आईटी, ट्रांसपोर्ट और अन्य कार्यों के लिए अलग-अलग कंपनियों को जिम्मेदारी दी जाएगी।
पुलिस मुख्यालय का कहना है कि नए प्रावधान पारदर्शिता और प्रतिस्पर्धा बढ़ाने के लिए जोड़े गए हैं, वहीं सूत्रों का कहना है कि इससे “योग्यता मानक” कमजोर होंगे और इमरजेंसी सेवाओं की गुणवत्ता पर असर पड़ सकता