रायपुर। छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद के खात्मे को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच बहुचर्चित झीरम घाटी हत्याकांड एक बार फिर सियासत के केंद्र में आ गया है। पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह और पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बीच इस मुद्दे पर तीखी बयानबाजी देखने को मिली है।
डॉ. रमन सिंह ने भूपेश बघेल पर निशाना साधते हुए कहा कि वे अक्सर झीरम घाटी नक्सल हमले के सबूत अपनी जेब में होने का दावा करते रहे हैं, लेकिन जब भी वे उन्हें पेश करने की बात करते हैं तो सिर्फ अखबार की कतरन ही सामने आती है। उन्होंने आरोप लगाया कि पांच साल के कार्यकाल में केवल आरोप-प्रत्यारोप की राजनीति की गई और ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
इस बयान पर पलटवार करते हुए भूपेश बघेल ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी ने कभी निष्पक्ष जांच होने ही नहीं दी। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा को सच्चाई सामने आने का डर है, इसलिए कोर्ट के जरिए जांच को बार-बार रोका गया। बघेल ने कहा कि यदि निष्पक्ष जांच कराई जाए तो सभी सबूत सामने लाए जा सकते हैं।
दोनों नेताओं के बीच यह जुबानी जंग सोशल मीडिया पर भी जारी रही, जहां एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगाए गए। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि झीरम घाटी कांड जैसे संवेदनशील मुद्दे पर सियासी बयानबाजी आने वाले समय में और तेज हो सकती है।
गौरतलब है कि 2013 में हुए इस नक्सली हमले में कई वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं की जान गई थी और यह घटना छत्तीसगढ़ की राजनीति में आज भी एक बड़ा मुद्दा बनी हुई है।