रायपुर, 28 दिसंबर 2025। छत्तीसगढ़ में बागेश्वर धाम के कथावाचक और धार्मिक प्रवक्ता पंडित धीरेंद्र शास्त्री की सरकारी विमान से यात्रा को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। इस मुद्दे पर कांग्रेस और भाजपा आमने-सामने हैं। कांग्रेस ने इसे सरकारी धन और संसाधनों का दुरुपयोग बताया है, जबकि सत्तारूढ़ भाजपा ने आरोपों को बेबुनियाद करार देते हुए पलटवार किया है।
• निजी धार्मिक कार्यक्रम से जुड़ा मामला
धीरेंद्र शास्त्री हाल ही में छत्तीसगढ़ दौरे पर आए थे। कांग्रेस का आरोप है कि वे एक निजी धार्मिक कार्यक्रम में शामिल होने आए थे और इसके लिए राज्य सरकार के विमान का उपयोग किया गया। विपक्ष का कहना है कि जब वे किसी संवैधानिक पद पर नहीं हैं, तो उन्हें सरकारी विमान की सुविधा किस नियम के तहत दी गई।
• कांग्रेस का आरोप: “सरकारी विमान बना हवाई टैक्सी”
कांग्रेस नेताओं ने सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि सरकारी विमान का उपयोग निजी धार्मिक कार्यक्रमों के लिए किया गया,किसी साधु-संत को विशेष सुविधा देना नियमों के विरुद्ध है केवल औपचारिक मुलाकात के लिए लाखों रुपये खर्च किए गए। कांग्रेस ने सवाल उठाया कि जब राज्य में स्वास्थ्य, शिक्षा और विकास कार्यों के लिए संसाधनों की कमी बताई जाती है, तब इस तरह का खर्च कैसे उचित ठहराया जा सकता है।
• संवैधानिक नियमों पर उठे सवाल
मामला अब केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि संवैधानिक और प्रशासनिक बहस का विषय बन गया है। जानकारों के अनुसार, सरकारी विमान का उपयोग सामान्यतः संवैधानिक पदाधिकारियों, आपात स्थितियों या आधिकारिक सरकारी कार्यों के लिए ही किया जाता है। ऐसे में यह स्पष्ट होना आवश्यक है कि धीरेंद्र शास्त्री की यात्रा किस श्रेणी में स्वीकृत की गई थी।
• भाजपा का पलटवार
भाजपा ने कांग्रेस के आरोपों को राजनीति से प्रेरित बताते हुए खारिज कर दिया है। पार्टी का कहना है कि कांग्रेस धार्मिक विषयों को जानबूझकर विवादित बना रही है और जनता का ध्यान भटकाने की कोशिश कर रही है।
• डिप्टी सीएम अरुण साव का बयान
पूरे मामले पर उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने कांग्रेस पर सीधा हमला बोला। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को इस मुद्दे पर सवाल उठाने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है। अरुण साव ने तंज कसते हुए कहा, “कांग्रेस के शासनकाल में नेताओं ने निजी जरूरतों के लिए भी सरकारी हेलीकॉप्टरों का उपयोग किया है। पहले कांग्रेस अपने कार्यकाल की समीक्षा करे।” सरकारी विमान यात्रा को लेकर उठा यह विवाद अब पूरी तरह राजनीतिक रंग ले चुका है। विपक्ष इसे सरकारी धन का दुरुपयोग बता रहा है, जबकि सत्तारूढ़ दल इसे दुर्भावनापूर्ण आरोप करार दे रहा है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा और तूल पकड़ सकता है।