रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजनीति इन दिनों पूर्व गृहमंत्री और वरिष्ठ आदिवासी नेता ननकीराम कंवर के अल्टीमेटम को लेकर गरमा गई है। कंवर ने कोरबा कलेक्टर अजीत वसंत को हटाने की मांग करते हुए सरकार को 3 दिन का समय दिया है। चेतावनी दी है कि यदि तय समय सीमा में कार्रवाई नहीं हुई, तो वे अपनी ही सरकार के खिलाफ धरने पर बैठेंगे। इस बयान ने प्रदेश की राजनीति में हलचल मचा दी है। विपक्ष ने इसे सरकार की अंदरूनी खींचतान बताते हुए सवाल खड़े किए हैं, वहीं बीजेपी के भीतर भी असमंजस की स्थिति बन गई है।
इस मसले पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने रायपुर में मीडिया से बातचीत करते हुए कहा– “अब उन्होंने मांग की है, तो उसमें जांच होगी। जांच के बाद ही कोई निर्णय लिया जाएगा।” CM का यह बयान साफ करता है कि सरकार फिलहाल मामले की पड़ताल के बाद ही कोई ठोस कदम उठाएगी।
आखिर क्यों नाराज हैं ननकीराम कंवर?
कंवर का आरोप है कि कलेक्टर अजीत वसंत मनमानी कर रहे हैं और संवैधानिक अधिकारों का दुरुपयोग कर रहे हैं। इतना ही नहीं, उन्होंने कलेक्टर पर अपनी पत्नी को जिला खनिज न्यास मद से मेडिकल कॉलेज अस्पताल में पदस्थ करने और बिना काम किए वेतन लेने का भी आरोप लगाया।
मेडिकल कॉलेज प्रबंधन ने ठुकराए आरोप
कलेक्टर की पत्नी डॉ. रूपल ठाकुर पर लगे आरोपों को मेडिकल कॉलेज प्रबंधन ने पूरी तरह खारिज कर दिया। अधीक्षक द्वारा जारी दस्तावेज़ों के अनुसार, डॉ. ठाकुर ने 15 जून 2024 को पदभार ग्रहण किया था और तब से 623 ऑपरेशन, प्रतिमाह लगभग 200 मरीजों की जांच और 72 दिन इमरजेंसी ड्यूटी की है।
इन प्रमाणिक दस्तावेज़ों के सामने आने के बाद कंवर के आरोप कमजोर पड़ते दिखाई दे रहे हैं। अब सबकी निगाहें इस पर टिकी हैं कि 3 दिन का अल्टीमेटम खत्म होने के बाद स्थिति क्या मोड़ लेती है और क्या वाकई ननकीराम कंवर सरकार के खिलाफ धरने पर बैठेंगे।