सियासत बनाम आस्था: भूपेश के बयान से गरमाई राजनीति, साहू समाज का अल्टीमेटम; बागेश्वर धाम प्रकरण में कार्रवाई पर भी बवाल

रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजनीति इन दिनों सियासत और आस्था के टकराव के बीच उलझ गई है। एक ओर पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बयान को लेकर साहू समाज और सत्ताधारी दल कांग्रेस पर हमलावर हैं, वहीं दूसरी ओर बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के पैर छूने पर एक ऑन-ड्यूटी थाना प्रभारी पर की गई कार्रवाई को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल द्वारा उपमुख्यमंत्री अरुण साव की तुलना ‘बंदर’ से किए जाने के बाद प्रदेश की सियासत में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। छत्तीसगढ़ प्रदेश साहू संघ ने इस टिप्पणी को समाज के सम्मान पर हमला बताते हुए कड़ा ऐतराज जताया है। संघ के अध्यक्ष नीरेंद्र साहू ने कहा कि समाज के पदाधिकारी सभी जिलों में पुलिस अधीक्षकों को ज्ञापन सौंपेंगे। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि भूपेश बघेल 10 दिन के भीतर समाज से माफी मांगकर बयान वापस नहीं लेते हैं, तो साहू समाज आंदोलन करेगा।
साहू समाज के तेवर देख कांग्रेस बैकफुट पर
साहू समाज के आक्रामक रुख के बाद कांग्रेस बैकफुट पर नजर आई। पार्टी के प्रदेश संचार विभाग के अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने सफाई देते हुए कहा कि भूपेश बघेल ने एक कहानी का उदाहरण दिया था, किसी व्यक्ति या समाज को अपमानित करने की मंशा नहीं थी। उन्होंने कहा कि राजनीति में विपक्ष का नेता सत्ता से सवाल करता है, तो उसे जाति या धर्म विशेष के अपमान से जोड़ना उचित नहीं है। उन्होंने साहू समाज से अपील की कि पूरा वीडियो देखने के बाद ही कोई निर्णय लिया जाए।
भाजपा का पलटवार
उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने भूपेश बघेल पर तीखा हमला करते हुए कहा कि वे बड़े नेता हैं और उन्हें भाषा की मर्यादा समझनी चाहिए। उन्होंने कहा कि जैसे वे भाषा की सीमा नहीं समझते, वैसे ही भ्रष्टाचार में भी सीमा नहीं समझी और उसमें भी नवाचार किया। वहीं उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने कहा कि राजनीति में शब्दों की मर्यादा जरूरी है। सियासी आलोचना अपनी जगह है, लेकिन इस तरह की भाषा का इस्तेमाल अक्षम्य है। कांग्रेस नेता टीएस सिंहदेव ने भूपेश का बचाव करते हुए कहा कि उन्होंने किसी समाज पर टिप्पणी नहीं की, बल्कि एक व्यक्ति पर राजनीतिक टिप्पणी की है। उन्होंने माना कि शब्दों के चयन में चूक हो सकती है।
क्या कहा था भूपेश बघेल ने
भूपेश बघेल ने कहा था कि अरुण साव के विभागों में कहीं काम नहीं हो रहा है। उन्होंने एक उदाहरण देते हुए कहा था कि जंगल में राजा बदलने की बात चली और अंत में ‘जंगल के जम्मो झन मिल के बेंदरा ल राजा बना दिस’ यानी जंगल के जानवरों ने मिलकर बंदर को राजा बना दिया।
बागेश्वर धाम प्रकरण से भड़का दूसरा विवाद
इसी बीच राजधानी रायपुर में बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री से जुड़े मामले ने भी तूल पकड़ लिया है। 25 दिसंबर को रायपुर एयरपोर्ट पर ड्यूटी के दौरान माना थाना प्रभारी द्वारा बाबा के पैर छूने के वीडियो के वायरल होने के बाद पुलिसकर्मी पर की गई कार्रवाई को लेकर बहस छिड़ गई है। पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने इसे ‘आस्था बनाम अनुशासन’ की गलत व्याख्या करार दिया। उन्होंने कहा कि वर्दी के भीतर भी इंसान होता है और उसकी भी आस्था होती है। कोई अपने पिता, मां या गुरु को प्रणाम करे, तो वह गलत कैसे हो सकता है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या वर्दी पहनने के बाद इंसान अपनी धार्मिक और व्यक्तिगत आस्था खो देता है? उन्होंने इसे बेवजह का विवाद बताते हुए पुलिसकर्मियों के योगदान को रेखांकित किया और कहा कि जब पूरा देश त्योहार मना रहा होता है, तब पुलिसकर्मी अपनी खुशियां छोड़कर सुरक्षा में तैनात रहते हैं।
क्या है पूरा मामला
दरअसल, हनुमंत कथा के लिए बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री 25 दिसंबर को सरकारी विमान से रायपुर पहुंचे थे। इस दौरान माना थाना प्रभारी मनीष तिवारी ने जूता और टोपी उतारकर उनके पैर छुए। इसका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया, जिसके बाद थाना प्रभारी पर कार्रवाई की मांग उठने लगी।

सियासी बयान, सामाजिक आक्रोश और आस्था से जुड़े विवादों के बीच छत्तीसगढ़ की राजनीति एक बार फिर गरमाती नजर आ रही है, जहां हर पक्ष अपने-अपने तर्कों के साथ आमने-सामने खड़ा है।

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