
जामगांव-आर । दक्षिण पाटन के केंद्रिबिंदु ग्राम पंचायत जामगांव-आर में सरकारी भूमि अवैध कब्जे के चपेट में है इसे लेकर स्थानीय ग्राम पंचायत द्वारा वर्ष 2025 में तीन अलग-अलग पत्रों के माध्यम से नायब तहसीलदार उपतहसील जामगांव-आर को ग्राम की गंभीर समस्याओं से अवगत कराया गया था। इनमें शासकीय भूमि पर अतिक्रमण, श्मशान घाट की जमीन पर कब्जा, तालाब किनारे अवैध निर्माण, सरकारी भूमि के सीमांकन तथा बाहरी लोगों द्वारा कथित अतिक्रमण और अव्यवस्था फैलाने जैसे मुद्दे शामिल थे। लेकिन हैरानी की बात यह है कि एक वर्ष बीत जाने के बाद भी प्रशासन की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
गौरतलब है कि 9 मई 2025 को भेजे गए पत्र में ग्राम पंचायत ने बस स्टैंड से लेकर तालाब और सड़क किनारे स्थित शासकीय भूमि पर अतिक्रमण की शिकायत की थी। पंचायत ने आरोप लगाया था कि चुनावी अवधि और आचार संहिता का लाभ उठाकर कुछ लोगों ने सरकारी जमीन पर दुकानें और मकान खड़े कर लिए हैं। इतना ही नहीं, श्मशान घाट की भूमि पर निजी सड़क निर्माण कर कब्जे की भी शिकायत दर्ज कराई गई थी। सरपंच रूपेंद्र शुक्ला ने बताया कि पशु चिकित्सालय, बांसताल, श्मशान घाट और थाना परिसर से संबंधित शासकीय भूमि का सीमांकन कराने की मांग की थी, ताकि भविष्य में इन जमीनों को अतिक्रमण से बचाया जा सके और सरकारी उपयोग में लाया जा सके। लेकिन सीमांकन की प्रक्रिया आज तक अधूरी है। उन्होंने बताया कि 15 मई 2025 को एक और पत्र भेजकर बाहरी लोगों द्वारा सरकारी भूमि पर कब्जा करने, ग्राम के माहौल को प्रभावित करने तथा तालाब किनारे किए गए निर्माणों को हटाने की मांग की थी। पंचायत ने तत्काल कार्रवाई की जरूरत बताते हुए सरकारी संपत्तियों की सुरक्षा का मुद्दा उठाया था।
ग्रामवासियों का कहना है कि सरकारी जमीनों की सुरक्षा और सार्वजनिक संपत्तियों के संरक्षण की जिम्मेदारी प्रशासन की है। ऐसे में एक वर्ष तक शिकायतों को फाइलों में दबाकर रखना प्रशासनिक उदासीनता का बड़ा उदाहरण माना जा रहा है। अब ग्रामीणों की नजर इस बात पर टिकी है कि प्रशासन इन पुराने मामलों की समीक्षा कर कार्रवाई करता है या फिर ये शिकायतें भी सरकारी फाइलों में धूल फांकती रह जाएंगी।
• अतिक्रमणकारियों पर कार्रवाई से परहेज क्यों?
पंचायत प्रतिनिधियों का आरोप है कि बार-बार शिकायतों और लिखित पत्राचार के बावजूद राजस्व विभाग और स्थानीय प्रशासन ने मामले को गंभीरता से नहीं लिया। परिणामस्वरूप कई स्थानों पर अतिक्रमण यथावत बना हुआ है और शासकीय भूमि की स्थिति को लेकर ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब ग्राम पंचायत ने विधिवत पत्राचार कर प्रशासन को समय रहते अवगत कराया था, तो आखिर कार्रवाई क्यों नहीं हुई?