YC न्यूज़ डेस्क। छत्तीसगढ़ से निकली युवा शक्ति इन दिनों हरिद्वार की दिव्य भूमि पर एक नए सामाजिक अध्याय की रचना कर रही है। रायपुर, कोरबा, दुर्ग, बलौदाबाजार, और राजनांदगांव जैसे जिलों से आए 700 से अधिक युवाओं ने गायत्री तीर्थ शांतिकुंज में आयोजित तीन दिवसीय चिंतन शिविर में हिस्सा लिया है। ये युवा महज़ तीर्थयात्री नहीं, बल्कि एक विचार यात्रा के वाहक हैं — जो बाल संस्कार, व्यसनमुक्ति और पर्यावरण जागरूकता जैसे अभियानों के जरिए अपने प्रदेश में नैतिक क्रांति लाने का संकल्प लेकर आए हैं।
हर की पौड़ी पर गूंजा संकल्प : “छत्तीसगढ़ हो शांत, समृद्ध और नैतिक”
शिविर के पहले दिन गंगा तट पर दीप जलाकर सामूहिक प्रार्थना करते इन युवाओं ने एक दिव्य क्षण रचा। उनके चेहरे पर प्रतिबद्धता और आंखों में भविष्य की छवि साफ दिख रही थी।
डॉ. चिन्मय पण्ड्या का संवाद : “नेतृत्व का अर्थ है सेवा में उतरना”
देवसंस्कृति विश्वविद्यालय के प्रतिकुलपति डॉ. चिन्मय पण्ड्या ने युवाओं से संवाद करते हुए कहा कि “मोटिवेशन अस्थायी है, दिशा स्थायी होती है।” युवाओं को आत्मविकास, अनुशासन और सामाजिक नेतृत्व की ओर प्रेरित किया गया।
शांतिकुंज व्यवस्थापक योगेन्द्र गिरि, राज्य समन्वयक ओमप्रकाश राठौर व अन्य मार्गदर्शकों ने युवाओं को कार्यशील विचार दिए — कि कैसे वे बाल संस्कार शालाओं, व्यसनमुक्त समाज और हरित अभियान के माध्यम से अपने-अपने जिलों को एक नया स्वरूप दे सकते हैं।
शिविर का उद्देश्य : जागरण नहीं, निर्माण
यह शिविर युवाओं को सिर्फ प्रेरणा नहीं, एक दिशा दे रहा है — कि वे केवल श्रोता न बनें, बल्कि समाज के सक्रिय निर्माता बनें।