जगदलपुर । छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री और गृहमंत्री विजय शर्मा ने गुरुवार को बड़ा बयान देते हुए कहा कि केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह द्वारा तय की गई 31 मार्च 2026 की नक्सलमुक्ति डेडलाइन से पहले राज्य को पूरी तरह सशस्त्र नक्सलियों से मुक्त कर दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि अब नक्सलियों के लिए केवल दो विकल्प हैं—या तो आत्मसमर्पण करें या फिर गोलियों का सामना करें। यह बात विजय शर्मा ने बस्तर दौरे के दौरान भाजपा कार्यालय में पत्रकारों से चर्चा करते हुए कही। उनके साथ राज्य के वन मंत्री केदार कश्यप, चित्रकोट विधायक विनायक गोयल, पूर्व विधायक संतोष बाफना और जिला पंचायत अध्यक्ष वेदवती कश्यप भी मौजूद थीं।
आत्मसमर्पण का आखिरी मौका
शर्मा ने चेतावनी दी कि सशस्त्र नक्सलियों को सरकार अब बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं करेगी। उन्होंने दो टूक कहा, “यदि नक्सली अपनी जान की परवाह करते हैं तो हथियार डालें, वरना हमारे जवान उन्हें मिटा देंगे।” उन्होंने दावा किया कि सरकार और सुरक्षा बल पूरी रणनीति के साथ काम कर रहे हैं और नक्सलवाद को जड़ से खत्म करने की दिशा में निर्णायक कदम उठाए जा चुके हैं।
झीरम कांड पर कांग्रेस को घेरा
पत्रकारों द्वारा झीरम घाटी हमले की न्यायिक जांच रिपोर्ट को सार्वजनिक करने के सवाल पर विजय शर्मा ने पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल पर निशाना साधते हुए कहा कि “भूपेश बघेल पांच साल तक जेब में झीरम कांड के सबूत लेकर घूमते रहे, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की। उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा कि नंदकुमार पटेल के बेटे उमेश पटेल खुद बघेल के मंत्रिमंडल में शामिल थे, फिर भी पूर्व सीएम उनसे वो सबूत नहीं निकलवा पाए। शर्मा ने भरोसा दिलाया कि भाजपा सरकार जल्द ही झीरम हमले के दोषियों को जनता के सामने लाएगी।
नक्सलवाद पर निर्णायक हमला
उपमुख्यमंत्री ने कहा कि आने वाले समय में बस्तर और उसके आस-पास के क्षेत्रों में सुरक्षा बलों की कार्रवाई और तेज होगी। सरकार का लक्ष्य न केवल नक्सलियों का खात्मा है, बल्कि प्रभावित क्षेत्रों में विकास और विश्वास को पुनर्स्थापित करना भी है।