जामगांव (एम) में आयुर्वेदिक औषधि इकाई एवं केंद्रीय भंडार गृह का 29 को लोकार्पण,सीएम साय के आगमन की तैयारी, प्रशासनिक हलचल तेज

पाटन । छत्तीसगढ़ में आयुर्वेदिक चिकित्सा और जैव तकनीकी क्षेत्र में एक नई क्रांति का शुभारंभ होने जा रहा है। छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज सहकारी संघ मर्यादित द्वारा पाटन ब्लॉक के जामगांव एम में निर्मित “आयुर्वेदिक औषधि इकाई एवं केंद्रीय भंडार गृह” तथा स्पेयर बायोटेक प्रा.लि. द्वारा पीपीपी (PPP) मॉडल के तहत निर्मित हर्बल्स एक्सट्रैक्शन इकाई का लोकार्पण 29 जून को मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के मुख्य आतिथ्य में किया जाएगा। हालांकि इस आयोजन को लेकर शासन स्तर से अभी अंतिम रूप से अधिकृत घोषणा नहीं की गई है, फिर भी प्रशासनिक स्तर पर कार्यक्रम की रूपरेखा तैयार की जा रही है।

इस गरिमामयी समारोह की अध्यक्षता कैबिनेट मंत्री केदार कश्यप करेंगे। कार्यक्रम में उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा विशेष अतिथि होंगे। इसके अलावा परमहंस पीठाधीश्वर श्री 1008 डॉ. स्वामी कैलाशानंद गिरी जी महाराज की आध्यात्मिक उपस्थिति समारोह को विशेष बनाएगी। कार्यक्रम में विजय बघेल, सांसद दुर्ग,स्थानीय विधायक भूपेश बघेल, विधायक गण डोमनलाल कोसरेवाड़ा,रिकेश सेन, ईश्वर साहू,ललित चन्द्राकर, गजेंद्र यादव, रामसेवक पैकरा, अध्यक्ष, वन विकास निगम, विकास मरकाम, अध्यक्ष, आयु. औषधि बोर्ड सहित स्थानीय जनप्रतिनिधि उपस्थित रहेंगे ।

हर्बल्स एक्सट्रैक्शन इकाई-एक नजर

यह परियोजना आयुर्वेदिक औषधियों के उत्पादन, संग्रहण एवं वितरण को सुव्यवस्थित करने में अहम भूमिका निभाएगी। हर्बल्स एक्सट्रैक्शन इकाई के माध्यम से स्थानीय वनोपज संग्रहकर्ताओं और किसानों को रोजगार के नए अवसर प्राप्त होंगे। आयुर्वेदिक प्रसंस्करण इकाई छत्तीसगढ़ की समृद्ध वन संपदा को विज्ञान और आधुनिक तकनीक से जोड़कर फॉरेस्ट टू फार्मेसी मॉडल को साकार करने की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल है। 27.87 एकड़ क्षेत्र में रू. 36.47 करोड़ की लागत से निर्मित आयुर्वेदिक प्रसंस्करण इकाई से प्रतिवर्ष लगभग रु. 50 करोड़ मूल्य के उत्पाद तैयार किए जाने का अनुमान है। यह इकाई प्रदेश में वनों में पाई जाने वाली औषधीय और लघु वनोपज जैसे महुआ, साल बीज, कालमेघ, गिलोय, अश्वगंधा आदि का संगठित एवं वैज्ञानिक प्रसंस्करण कर चूर्ण, सिरप, तेल, टैबलेट एवं अवलेह जैसे गुणवत्तापूर्ण आयुर्वेदिक उत्पादों का निर्माण करेगी। यह इकाई छत्तीसगढ़ हर्बल्स ब्रांड के तहत प्रदेश के उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय बाजार में पहचान दिलाने का प्रमुख केंद्र भी बनेगी। परियोजना के अंतर्गत 1000 से अधिक लोगों को प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर प्राप्त होंगे। इसमें बड़ी संख्या में महिलाओं की प्राथमिक प्रसंस्करण कार्यों में भागीदारी सुनिश्चित होगी, जिससे उन्हें स्वरोजगार का अवसर मिलेगा। वहीं युवाओं को तकनीकी प्रशिक्षण प्राप्त होने से स्थानीय स्तर पर आजीविका के नए द्वार खुलेंगे। 

आयुर्वेदिक प्रसंस्करण इकाई में आधुनिक वेयरहाउस की 20,000 मीट्रिक टन की संग्रहण क्षमता विकसित की गई है, जिससे सीजनल वनोपजों के दीर्घकालीन संरक्षण एवं गुणवत्ता नियंत्रण में सहायता मिलेगी। यह परियोजना प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के वोकल फॉर लोकल और आत्मनिर्भर भारत के विजन को मूर्तरूप देती है। यह न केवल वन उत्पादों के स्थानीय मूल्य संवर्धन का उदाहरण प्रस्तुत करती है, बल्कि पर्यावरणीय संतुलन, आर्थिक विकास और सामाजिक समावेशिता को भी सशक्त बनाती है। 

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