YC न्यूज़ डेस्क। उत्तराखंड के चारधाम—केदारनाथ, बद्रीनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री—में जल्द गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर प्रतिबंध लग सकता है। इस संबंध में बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (BKTC) सहित गंगोत्री और यमुनोत्री धाम मंदिर समितियों के बीच प्रस्ताव पर सहमति बन गई है। यह प्रतिबंध सिख धर्म समेत हिंदू धर्म की शाखाओं में आने वाले अनुयायियों पर लागू नहीं होगा। चारधाम के अलावा मंदिर समितियों के अधीन आने वाले 44 अन्य मंदिरों के लिए भी इसी तरह के प्रस्ताव तैयार किए गए हैं। बीकेटीसी के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने बताया कि बद्रीनाथ और केदारनाथ सहित समिति के अधीन सभी मंदिरों में गैर-हिंदुओं की एंट्री पर रोक का प्रस्ताव आगामी बोर्ड बैठक में रखा जाएगा। इस बैठक में तीर्थ पुरोहित और धर्माधिकारी भी शामिल रहेंगे।
इससे पहले गंगोत्री मंदिर समिति ने रविवार को बैठक कर सर्वसम्मति से निर्णय लिया कि गंगोत्री धाम में मंदिर और गंगा घाटों पर गैर-हिंदुओं का प्रवेश प्रतिबंधित रहेगा। मंदिर समिति के सचिव सुरेश सेमवाल ने स्पष्ट किया कि सिख धर्म के अनुयायी हिंदू धर्म की ही एक शाखा माने जाते हैं, इसलिए उन पर यह प्रतिबंध लागू नहीं होगा। वहीं, यमुनोत्री धाम मंदिर समिति ने भी गैर-हिंदुओं की एंट्री पर बैन का प्रस्ताव तैयार कर लिया है। समिति के सचिव पुरुषोत्तम उनियाल ने बताया कि इसे जल्द लागू करने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी और हिंदू धर्म की शाखाओं में आने वाले अनुयायियों को इससे बाहर रखा जाएगा।
• देवभूमि की परंपराओं का हवाला
बीकेटीसी अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने कहा कि देवभूमि उत्तराखंड की धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं का पालन आवश्यक है। इसी उद्देश्य से समिति अपने अधीन आने वाले मंदिरों में गैर-हिंदुओं की एंट्री को लेकर प्रस्ताव लाने जा रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि गैर-हिंदू से आशय उन लोगों से है, जिनकी सनातन धर्म में आस्था नहीं है। जो लोग सनातन परंपरा में विश्वास रखते हैं, उनके लिए चारों धाम खुले रहेंगे।
विधायक ने किया फैसले का स्वागत
गंगोत्री विधानसभा क्षेत्र के विधायक सुरेश चौहान ने मंदिर समिति के निर्णय का स्वागत करते हुए कहा कि यह फैसला एक स्वतंत्र संस्था के रूप में लिया गया है। उन्होंने कहा कि सरकार कानून के तहत उचित प्रक्रिया अपनाएगी।
सीएम का रुख—कानून का अध्ययन जरूरी
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि सरकार धामों के संचालन से जुड़े धार्मिक संगठनों, तीर्थ पुरोहितों और संत समाज की राय के आधार पर ही आगे निर्णय लेगी। उन्होंने बताया कि इन स्थलों के लिए पहले से बने कानूनों का अध्ययन किया जा रहा है और उसी के अनुरूप फैसला लिया जाएगा।
कानूनी पहलू और लागू होने की प्रक्रिया
श्री बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति का गठन ‘द यूपी श्री बद्रीनाथ और श्री केदारनाथ टेंपल एक्ट, 1939’ के तहत किया गया है। इस अधिनियम में समिति को मंदिरों के प्रशासन, व्यवस्था और नियम बनाने का अधिकार दिया गया है। हालांकि, बायलॉज को प्रभावी करने के लिए उनका प्रकाशन और राज्य सरकार की पुष्टि आवश्यक होगी। ऐसे में केवल प्रस्ताव पास होना अंतिम कदम नहीं होगा।
यात्रियों में असमंजस
हर साल देशभर से लाखों श्रद्धालु चारधाम यात्रा पर आते हैं। वर्ष 2025 के यात्रा सीजन में केदारनाथ धाम में 16.56 लाख से अधिक और बद्रीनाथ धाम में करीब 16.5 लाख श्रद्धालुओं ने दर्शन किए। ऐसे में गैर-हिंदू एंट्री बैन से जुड़ा कोई भी फैसला केवल उत्तराखंड ही नहीं, बल्कि देशभर के यात्रियों को प्रभावित कर सकता है।
फिलहाल प्रस्ताव पर अंतिम निर्णय बोर्ड बैठक के बाद ही होगा। ऐसे में यात्रियों की नजर इस बात पर टिकी है कि प्रस्ताव पास होने के बाद इसे किस रूप में और किस प्रक्रिया के तहत लागू किया जाता है।