भिलाई। शहर के निजी स्कूलों में शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई) के तहत प्रवेश पाए 75 बच्चों को स्कूल से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया। इन बच्चों के प्रवेश में एडमिशन माफिया की भूमिका सामने आने के बाद यह कार्रवाई की गई। अब प्रशासन इन बच्चों को नए सिरे से प्रवेश दिलाने की तैयारी कर रहा है ताकि उनकी शिक्षा प्रभावित न हो। गौरतलब है कि बच्चों के दाखिले के लिए आरटीई की 25 प्रतिशत आरक्षित सीटों का दुरुपयोग कर माफिया सक्रिय थे, जिन्होंने फर्जी दस्तावेजों के जरिए बच्चों को प्रवेश दिलाया। जब इस अनियमितता का खुलासा हुआ, तो स्कूल प्रबंधन ने 75 बच्चों का नाम काट दिया।
दुर्ग सांसद विजय बघेल ने इस गंभीर मामले पर संज्ञान लेते हुए मुख्यमंत्री को पत्र लिखा है और शिक्षा के अधिकार अधिनियम में संशोधन कर सख्त प्रावधान करने की मांग की है। साथ ही लोकसभा में संशोधन विधेयक पेश करने की भी तैयारी की जा रही है।
आरटीई अधिनियम में संशोधन की जरूरत
विजय बघेल ने कहा कि 2009 से लागू आरटीई अधिनियम में यह प्रावधान नहीं है कि गलत दस्तावेजों पर प्रवेश पाए बच्चों को हटाने के बाद उन्हें अन्य विद्यालय में प्रवेश दिया जाए। इसी का लाभ उठाकर माफिया सक्रिय हैं और जरूरतमंद बच्चों का हक छीना जा रहा है।
संशोधन विधेयक के मुख्य बिंदु
✅ धारा 12 (1)(c) में संशोधन कर यह प्रावधान किया जाए कि गलत दस्तावेजों पर प्रवेश पाए बच्चों को हटाने के बाद अन्य मान्यता प्राप्त विद्यालय में प्रवेश सुनिश्चित किया जाए।
✅ धारा 2 के उपबंध में परिभाषा को स्पष्ट कर जरूरतमंद बच्चों की पहचान के लिए मानक तय किए जाएं।
विशेषज्ञों की राय
शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि एडमिशन प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने और माफियाओं पर नकेल कसने के लिए अधिनियम में संशोधन समय की मांग है। इसके साथ ही स्कूल प्रबंधन की जवाबदेही तय करने की जरूरत है ताकि भविष्य में ऐसे मामले न हों।
जनता से अपील
अधिकारियों ने अपील की है कि कोई भी संदिग्ध प्रवेश या दस्तावेजों की जानकारी होने पर तुरंत शिक्षा विभाग अथवा प्रशासन को सूचित करें ताकि समय रहते कार्रवाई की जा सके।