बस्तर दशहरा के ऐतिहासिक मुरिया दरबार में शामिल होंगी राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, 23 अक्टूबर को जगदलपुर में होगा भव्य आयोजन

बस्तर दशहरा के ऐतिहासिक मुरिया दरबार में शामिल होंगी राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, 23 अक्टूबर को जगदलपुर में होगा भव्य आयोजन

राष्ट्रपति भवन में बस्तर के युवाओं ने दिया था आमंत्रण, अब 23 अक्टूबर को सिरहासार भवन में साकार होगा आत्मीय निमंत्रण

रायपुर, 19 अक्टूबर 2026। छत्तीसगढ़ के विश्वप्रसिद्ध बस्तर दशहरा के अंतर्गत आयोजित होने वाले ऐतिहासिक मुरिया दरबार में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू शामिल होंगी। 23 अक्टूबर को जगदलपुर के ऐतिहासिक सिरहासार भवन में होने वाला यह आयोजन बस्तर की समृद्ध जनजातीय संस्कृति, सदियों पुरानी परंपराओं और सामाजिक विरासत के लिए गौरवपूर्ण अवसर होगा। राष्ट्रपति की सहभागिता से बस्तर की विशिष्ट सांस्कृतिक पहचान और पारंपरिक संवाद व्यवस्था को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिलने की उम्मीद है। बस्तर दशहरा केवल धार्मिक आस्था का पर्व नहीं, बल्कि जनजातीय जीवनशैली, सामाजिक एकता और लोक परंपराओं का अनूठा संगम भी है।

राष्ट्रपति भवन में बस्तर के युवाओं ने दिया था आमंत्रण

राष्ट्रपति के मुरिया दरबार में शामिल होने के पीछे बस्तर के प्रतिनिधियों और युवाओं का आत्मीय आमंत्रण भी खास महत्व रखता है। बस्तर का मांझी दल और बस्तर पंडुम के विजेता राष्ट्रपति से मुलाकात करने नई दिल्ली स्थित राष्ट्रपति भवन पहुंचे थे। इस दौरान उन्होंने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को विश्वप्रसिद्ध बस्तर दशहरा और पारंपरिक मुरिया दरबार में शामिल होने का निमंत्रण दिया था।.इस मुलाकात के दौरान राष्ट्रपति ने आमंत्रण सहर्ष स्वीकार किया और बस्तर से पहुंचे अतिथियों का आत्मीय स्वागत करते हुए अपने हाथों से भोजन भी परोसा था। बस्तर के युवाओं ने भी उन्हें अपनी संस्कृति और परंपराओं के अनुरूप स्वागत करने का भरोसा दिलाया था। अब 23 अक्टूबर को राष्ट्रपति का मुरिया दरबार में शामिल होना उस आत्मीय निमंत्रण के साकार होने का विशेष अवसर बनेगा।

बस्तर की पारंपरिक संवाद व्यवस्था का प्रतीक है मुरिया दरबार

मुरिया दरबार बस्तर की सदियों पुरानी पारंपरिक संवाद व्यवस्था का महत्वपूर्ण प्रतीक है। इसमें मांझी-चालकी और अन्य पारंपरिक प्रतिनिधियों की सहभागिता जनजातीय समाज की विशिष्ट सामाजिक संरचना और सांस्कृतिक मूल्यों को दर्शाती है।

यह परंपरा सामूहिक भागीदारी, आपसी संवाद और सामाजिक सहभागिता को मजबूत करने के साथ पीढ़ी-दर-पीढ़ी सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित रखने का माध्यम रही है। राष्ट्रपति की उपस्थिति से इस ऐतिहासिक परंपरा को राष्ट्रीय स्तर पर विशेष महत्व मिलने के साथ नई पीढ़ी को अपनी जड़ों और सांस्कृतिक पहचान से जुड़ने की प्रेरणा मिलेगी।

राष्ट्रपति के स्वागत को लेकर बस्तर में उत्साह

राष्ट्रपति के आगमन को लेकर जनजातीय समाज, मांझी-चालकी और बस्तर दशहरा से जुड़े पारंपरिक प्रतिनिधियों में विशेष उत्साह है। यह आयोजन बस्तर की सांस्कृतिक अस्मिता, गौरवशाली परंपराओं और उसकी विशिष्ट पहचान को देश के सामने प्रस्तुत करने का महत्वपूर्ण अवसर होगा।

इस अवसर पर राज्यपाल रमेन डेका, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, उप मुख्यमंत्री अरुण साव एवं विजय शर्मा, संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल सहित प्रदेश के मंत्रीगण, बस्तर सांसद, जगदलपुर विधायक, जिला पंचायत अध्यक्ष, जगदलपुर महापौर, वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी, बस्तर दशहरा समिति के सदस्य, मांझी-चालकी और अन्य पारंपरिक पदाधिकारियों के उपस्थित रहने की जानकारी दी गई है।

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