IGKV पेपर लीक का मास्टरमाइंड निकला प्रोफेसर, ₹2,500 के कैमरे से बनाया प्रश्नपत्र का वीडियो; ₹11 हजार में छात्रों को बेचा, 6 गिरफ्तार-36 घंटे की जांच में खुला पूरा नेटवर्क

IGKV पेपर लीक का मास्टरमाइंड निकला प्रोफेसर, ₹2,500 के कैमरे से बनाया प्रश्नपत्र का वीडियो; ₹11 हजार में छात्रों को बेचा, 6 गिरफ्तार-36 घंटे की जांच में खुला पूरा नेटवर्क

रायपुर। इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय (IGKV) के B.Sc. कृषि पाठ्यक्रम की परीक्षाओं के पेपर लीक मामले में पुलिस ने बड़ा खुलासा किया है। मामले में एक प्रोफेसर समेत 6 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि 2 आरोपी अभी फरार हैं। पुलिस के मुताबिक, दुर्ग के एक निजी कृषि कॉलेज का प्रोफेसर योगेश सोनकेसरिया इस पूरे मामले का मास्टरमाइंड बताया जा रहा है। मामला तेलीबांधा थाना क्षेत्र का है। पुलिस के अनुसार आरोपी प्रोफेसर ने सीलबंद प्रश्नपत्र वाले लिफाफे में सुई और नुकीले उपकरण से छोटा सा छेद किया। इसके बाद करीब ₹2,500 में खरीदे गए एंडोस्कोपी कैमरे को उस छेद के जरिए लिफाफे के अंदर डालकर प्रश्नपत्र का वीडियो बनाया। वीडियो से प्रश्नपत्र की सामग्री की कॉपी तैयार की गई और उसे छात्रों को ₹11 हजार में बेच दिया गया।

दो परीक्षाओं के पेपर लीक होने का मामला

जांच में B.Sc. कृषि फर्स्ट ईयर के प्लांट पैथोलॉजी और सेकंड ईयर के दूसरे सेमेस्टर के कीटशास्त्र विषय के प्रश्नपत्र लीक होने की बात सामने आई है। दोनों परीक्षाएं विश्वविद्यालय से जुड़े 28 कृषि कॉलेजों में आयोजित होनी थीं। पुलिस के मुताबिक, पहले सेकंड ईयर के कीटशास्त्र का पेपर लीक होने की जानकारी सामने आई। जांच आगे बढ़ी तो फर्स्ट ईयर के प्लांट पैथोलॉजी का प्रश्नपत्र भी लीक किए जाने का पता चला।

प्रश्नपत्र घर ले गया था प्रोफेसर

पुलिस जांच में सामने आया कि योगेश सोनकेसरिया दुर्ग जिले के भारती एग्रीकल्चर कॉलेज में वर्ष 2019 से प्रोफेसर है। वह पिछले करीब एक साल से अपने कॉलेज की उत्तर पुस्तिकाएं जमा करने और परीक्षाओं के प्रश्नपत्र लेने के लिए रायपुर कृषि महाविद्यालय आता था। पुलिस के अनुसार 17 अगस्त को वह रायपुर के जोरा स्थित कृषि महाविद्यालय पहुंचा था। उत्तर पुस्तिकाएं जमा करने के दौरान उसने आगामी परीक्षा के प्रश्नपत्र भी लिए। इसके बाद कीटशास्त्र का प्रश्नपत्र वाला सीलबंद लिफाफा अपने घर ले गया। वहां उसने लिफाफे में छोटा छेद कर कैमरे के जरिए प्रश्नपत्र का वीडियो रिकॉर्ड किया। इसके बाद प्रश्नपत्र की सामग्री की नकल तैयार कर अपने कॉलेज के छात्रों को बेच दी।

₹11 हजार में छात्रों को बेचा पेपर

जांच के मुताबिक, तैयार की गई प्रश्नपत्र की कॉपी करीब ₹11 हजार में छात्रों को बेची गई। इसके बाद पेपर अजय नायक के जरिए त्रिदेव पटेल, नितिन पाण्डेय, अनुज मिंज और आदित्य साहू तक पहुंचा। बाद में प्रश्नपत्र सोशल मीडिया के जरिए वायरल हो गया। पेपर लीक की जानकारी सामने आने के बाद विश्वविद्यालय प्रबंधन ने परीक्षा स्थगित कर दी। कवर्धा कृषि कॉलेज और विश्वविद्यालय के अधिकारियों को ई-मेल के माध्यम से भी पेपर लीक की जानकारी मिली थी। इसके बाद विश्वविद्यालय की ओर से तेलीबांधा थाने में शिकायत दर्ज कराई गई।

36 घंटे की जांच में खुला पूरा नेटवर्क

मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने तकनीकी जांच शुरू की। पूछताछ और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर पुलिस को दुर्ग निवासी अनुज मिंज के बारे में जानकारी मिली। उसे हिरासत में लेकर पूछताछ की गई, जिसके बाद पेपर लीक नेटवर्क से जुड़े अन्य आरोपियों के बारे में सुराग मिले। पुलिस की अलग-अलग टीमें कबीरधाम, रायपुर, दुर्ग और बिलासपुर समेत कई जिलों में भेजी गईं। करीब 36 घंटे की लगातार जांच के बाद पुलिस ने मामले का खुलासा करते हुए प्रोफेसर समेत 6 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।

कैमरा, मोबाइल और नकदी जब्त

पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से ₹11 हजार नकद, 6 मोबाइल फोन, वीडियो रिकॉर्डिंग डिवाइस, केबल, मोबाइल कनेक्टर, सुई, सूजा, कॉपी और फेविकोल समेत अन्य सामग्री जब्त की है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि पेपर लीक के इस नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल थे।

दो आरोपी अब भी फरार

मामले में कुल 6 आरोपियों की गिरफ्तारी की गई है, जबकि 2 आरोपी अभी फरार बताए जा रहे हैं। उनकी तलाश के लिए पुलिस की टीमें लगातार दबिश दे रही हैं। गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के आधार पर पेपर लीक से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। पुलिस का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद मामले में शामिल सभी आरोपियों और पेपर लीक के पूरे नेटवर्क की जानकारी सामने लाई जाएगी।

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