सीमेंट खदान परियोजना के खिलाफ जनाक्रोश: 50+ गांवों के 1000 ग्रामीण दुर्ग पहुंचे, 11 दिसंबर की जनसुनवाई रद्द करने की मांग; EIA रिपोर्ट पर गंभीर सवाल

दुर्ग। खैरागढ़–छुईखदान–गंडई जिले में प्रस्तावित सीमेंट कंपनी की लाइमस्टोन खदान परियोजना के खिलाफ ग्रामीणों का विरोध तेज़ हो गया है। शुक्रवार को पंडरिया, बिचारपुर, बुंदेली, बुंदेली, भरदागोंड, संडी सहित लगभग 50 गांवों के 1000 से अधिक ग्रामीण, जिनमें बड़ी संख्या में महिलाएं, किसान और युवा शामिल थे, दुर्ग स्थित छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल के क्षेत्रीय कार्यालय पहुंचे और 11 दिसंबर 2025 को प्रस्तावित जनसुनवाई को रद्द करने की मांग को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया। ग्रामीणों के मुताबिक, कंपनी द्वारा पेश की गई पर्यावरण प्रभाव आकलन (EIA) रिपोर्ट जानबूझकर अंग्रेजी में जारी की गई है, ताकि स्थानीय ग्रामीण, किसान और महिलाएं इसे समझ न पाएं और समय रहते आपत्ति दर्ज न करा सकें। विरोधी ग्रामीणों ने बताया कि जनसुनवाई की अधिसूचना सामने आने के बाद से पूरे क्षेत्र में भय, गुस्सा और असंतोष का माहौल है।

EIA रिपोर्ट पर ग्रामीणों के गंभीर आरोप
मंडल कार्यालय को सौंपे गए ज्ञापन में ग्रामीणों ने सिलसिलेवार बिंदुओं में आपत्तियां दर्ज कराई हैं, जिनमें केवल 10 पेज का अंग्रेजी सारांश,EIA सारांश मात्र 10 पृष्ठों का, और वह भी पूरी तरह अंग्रेजी में उपलब्ध कराया गया,
जिससे ग्रामीणों को परियोजना के प्रभाव, शर्तों और भविष्य के जोखिमों की समुचित जानकारी नहीं मिल सकी।
भूमि अधिग्रहण और मुआवजे का कोई विवरण नहीं,404 हेक्टेयर की इस विशाल परियोजना में भूमि अधिग्रहण, संभावित विस्थापन और मुआवजा नीति को लेकर एक भी स्पष्ट पंक्ति रिपोर्ट में नहीं दी गई है,जबकि हजारों ग्रामीणों की कृषि भूमि सीधे प्रभावित होने की आशंका है।कई गांवों को अध्ययन क्षेत्र में शामिल नहीं किया गया ! ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि 10 किलोमीटर के EIA अध्ययन क्षेत्र में आने वाले कई गांवों का नाम तक रिपोर्ट में नहीं है, जिससे आकलन अधूरा और पक्षपातपूर्ण प्रतीत हो रहा है।

13 जल स्रोत पर संकट, लेकिन रिपोर्ट में आकलन शून्य
ज्ञापन में कहा गया कि परियोजना से 13 महत्वपूर्ण जलस्रोत — जिनमें नदियां, नाले, नहर और भूजल स्तर शामिल हैं — सीधे प्रभावित होंगे,लेकिन रिपोर्ट में इन जल स्रोतों के प्रभाव का वस्तुनिष्ठ आकलन गायब है। भारी वाहनों से ट्रैफिक और जनजीवन पर असर, सर्वे नदारद,ग्रामीणों ने बताया कि खदान खुलने से भारी ट्रकों और मशीनों की आवाजाही बढ़ेगी,जिससे स्कूल, बाजार, खेत, संपर्क सड़कें और ग्रामीण जीवन बुरी तरह प्रभावित होंगे,लेकिन कंपनी ने ट्रैफिक सर्वे (Traffic Study) नहीं कराया, जो परियोजना की विश्वसनीयता पर बड़ा सवाल है।

“लाल श्रेणी उद्योग से स्वास्थ्य और पर्यावरण को खतरा”
ग्रामीणों ने स्पष्ट कहा है कि:“सीमेंट प्लांट और लाइमस्टोन खदान लाल श्रेणी (Red Category) के उच्च जोखिम वाले उद्योग हैं, फिर भी इस पर प्रदूषण और स्वास्थ्य प्रभाव रिपोर्ट में अस्पष्टता रखी गई है। यह परियोजना हमारी खेती, जल, स्वास्थ्य और पर्यावरण को बर्बाद कर देगी।”ग्रामीणों में यह आशंका गहरी है कि खदान शुरू होने से:खेती योग्य भूमि बंजर हो जाएगी,भूजल स्तर गिर जाएगा,धूल, शोर और प्रदूषण से बीमारियां बढ़ेंगी,और हजारों परिवारों की आजीविका तबाह हो जाएगी।

पूर्व विधायक भी आंदोलन में उतरे
आंदोलन को राजनीतिक समर्थन भी मिल गया है। खैरागढ़ के पूर्व विधायक गिरवर जंघेल विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए और कहा कि:“जिस क्षेत्र में यह खदान प्रस्तावित है, वह घनी आबादी और उपजाऊ कृषि भूमि वाला क्षेत्र है। यह परियोजना किसी भी कीमत पर जनता के हित में नहीं है।”उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि:“अगर यह खदान खुली तो हजारों परिवार उजड़ जाएंगे, सरकार को जनसुनवाई तुरंत रद्द कर इस परियोजना पर पुनर्विचार करना चाहिए।”

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