युक्तियुक्तकरण बना शिक्षकों की मानसिक पीड़ा का कारण,
दुर्ग। छत्तीसगढ़ प्रदेश शिक्षक फेडरेशन ने शिक्षा विभाग की युक्तियुक्तकरण नीति को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। फेडरेशन के प्रांतीय अध्यक्ष राजेश चटर्जी और अन्य पदाधिकारियों ने आरोप लगाया कि युक्तियुक्तकरण की आड़ में शिक्षकों का मानसिक और आर्थिक शोषण किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि प्रदेशभर में यह नीति स्थानांतरण का खेल बन चुकी है, जिससे शिक्षकों को “काला पानी” जैसी सजा भुगतनी पड़ रही है।
फेडरेशन ने स्पष्ट किया कि संविधान के अनुच्छेद 309 के तहत सेवा भर्ती नियमों में कलेक्टर और एसडीएम को नियुक्ति प्राधिकारी नहीं माना गया है, फिर भी इन अधिकारियों की अध्यक्षता में युक्तियुक्तकरण समितियाँ बनाई गईं। यह पूरी प्रक्रिया सेवा भर्ती नियमों का खुला उल्लंघन है।
फेडरेशन ने कहा कि नियुक्ति प्राधिकारी के बिना जारी आदेश असंवैधानिक हैं। राजेश चटर्जी ने कहा कि “यदि किसी शिक्षक की पदस्थापना गलत है तो उसके लिए जिम्मेदार अधिकारी सही कैसे हो सकते हैं?” उन्होंने आरोप लगाया कि कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से पीड़ित शिक्षकों को भी दुर्गम विद्यालयों में भेजा जा रहा है।
फेडरेशन ने मिडिल स्कूल में विषयवार अतिशेष गणना की मनमानी पर भी सवाल उठाए। उदाहरण दिया गया कि वाणिज्य विषय मिडिल स्कूल में पढ़ाया ही नहीं जाता, फिर भी इस आधार पर शिक्षकों को अतिशेष करार दिया गया।
फेडरेशन ने चेतावनी दी कि यह नीति सरकारी स्कूलों को कमजोर कर निजी स्कूलों को लाभ पहुंचाने की साजिश है। यदि सरकारी स्कूलों में विषय शिक्षकों की कमी हुई तो विद्यार्थी अन्यत्र जाएंगे और सरकारी स्कूल बंद होने की कगार पर पहुंचेंगे।
फेडरेशन ने सरकार से मांग की कि इस पर पुनर्विचार कर नियमों के तहत पारदर्शी प्रक्रिया अपनाई जाए। साथ ही सवाल किया कि वित्त विभाग की स्वीकृति के बिना 2008 के सेटअप में कटौती कैसे की गई? और क्या युक्तियुक्तकरण से वास्तव में सभी शिक्षाविहीन विद्यालयों में शिक्षक उपलब्ध हो पाए?