बिलासपुर। छत्तीसगढ़ में चर्चित मानव तस्करी व धर्मांतरण प्रकरण में गिरफ्तार दो नन प्रीति मैरी, वंदना फ्रांसिस और उनके सहयोगी सुखमन मंडावी को बिलासपुर स्थित विशेष एनआईए न्यायालय से सशर्त जमानत मिल गई है। न्यायाधीश सिराजुद्दीन कुरैशी की अदालत ने सुनवाई के दौरान कहा कि एफआईआर मुख्यतः संदेह के आधार पर दर्ज की गई प्रतीत होती है, और अभियोजन पक्ष कोई ठोस प्रमाण प्रस्तुत नहीं कर सका। गौरतलब है कि तीनों आरोपी 25 जुलाई 2025 से न्यायिक हिरासत में थे। इनके विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 143 (गैरकानूनी सभा) और छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य अधिनियम 2023 की धारा 4 (धर्मांतरण का आरोप) के अंतर्गत मामला दर्ज किया गया था।
कोर्ट ने कहा – “जमानत नियम, जेल अपवाद”
जमानत मंजूर करते हुए न्यायालय ने सुप्रीम कोर्ट के उस ऐतिहासिक निर्णय का हवाला दिया, जिसमें कहा गया है कि “जमानत एक सामान्य नियम है, और जेल अपवाद।” इसी आधार पर तीनों आरोपियों को ₹50,000 के निजी मुचलके और दो स्थानीय जमानतदारों के साथ रिहा करने के आदेश दिए गए।
जमानत की प्रमुख शर्तें:
आरोपी विदेश यात्रा नहीं कर सकेंगे
पासपोर्ट न्यायालय में जमा करने होंगे
हर 15 दिन में स्थानीय थाने में हाज़िरी देनी होगी
मीडिया में कोई सार्वजनिक बयान नहीं देंगे
कोर्ट ने माना – “पीड़िताएं बालिग, आरोप संगठित अपराध जैसे नहीं”
अदालत ने अपने आदेश में यह भी उल्लेख किया कि इस मामले में सभी कथित पीड़िताएं बालिग हैं तथा किसी भी आरोपी का कोई पूर्व आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है। आरोपियों के विरुद्ध संगठित आपराधिक कृत्य के पर्याप्त साक्ष्य भी प्रस्तुत नहीं हुए।