
रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र के पांचवें और अंतिम दिन महतारी वंदन योजना, कानून-व्यवस्था, हसदेव अरण्य और अन्य जनहित के मुद्दों को लेकर सदन में जोरदार हंगामा देखने को मिला। महतारी वंदन योजना से 1.55 लाख महिलाओं के नाम हटाए जाने के मुद्दे पर कांग्रेस ने सरकार को घेरा और जवाब से असंतुष्ट होकर सदन से वॉकआउट कर दिया। वहीं नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने साय सरकार के खिलाफ 136 बिंदुओं का आरोप पत्र पेश करते हुए अविश्वास प्रस्ताव रखा, जिस पर सदन में चर्चा जारी रही।
प्रश्नकाल के दौरान महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने बताया कि महतारी वंदन योजना के लाभार्थियों की संख्या 70.09 लाख से घटकर 68.54 लाख हो गई है। उन्होंने कहा कि जिन महिलाओं के नाम हटाए गए हैं, उनमें मृत्यु, ई-केवाईसी नहीं होना, आयकरदाता बनना अथवा अन्य कारणों से अपात्र पाए जाने जैसे तथ्य शामिल हैं। मंत्री के जवाब से असंतुष्ट कांग्रेस विधायकों ने नारेबाजी करते हुए सदन से वॉकआउट किया। प्रश्नकाल में सार्वजनिक वितरण प्रणाली का मुद्दा भी प्रमुखता से उठा। विधायक शेषराज हरबंस ने अंत्योदय राशन कार्डधारियों को अतिरिक्त 7 किलो चावल देने की मांग की। वहीं भाजपा विधायक सुशांत शुक्ला ने राशन दुकानों में उपभोक्ताओं पर कथित रूप से मसाले खरीदने का दबाव बनाए जाने का आरोप लगाया। खाद्य मंत्री दयालदास बघेल ने कहा कि यदि शिकायत और दस्तावेज उपलब्ध कराए जाते हैं तो पूरे मामले की जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
प्रश्नकाल समाप्त होने के बाद नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश करते हुए कई मुद्दों पर सरकार को कठघरे में खड़ा किया। उन्होंने सबसे पहले हसदेव अरण्य में कोयला खनन और पेड़ों की कटाई का मुद्दा उठाते हुए कहा कि पर्यावरण की दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील क्षेत्र को खनन के लिए खोला जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि लगभग 15 हजार पेड़ों की कटाई का रास्ता साफ कर दिया गया है और प्रदेश के जंगलों को उद्योगों के हित में नुकसान पहुंचाया जा रहा है। महंत ने कहा कि हसदेव अरण्य केवल जंगल नहीं, बल्कि मध्य भारत के “फेफड़े” हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश की प्राकृतिक संपदा को बाहरी उद्योगों के हित में इस्तेमाल किया जा रहा है, जिससे पर्यावरण और वन्यजीवों पर गंभीर प्रभाव पड़ रहा है। उन्होंने मानव-हाथी संघर्ष बढ़ने की आशंका भी जताई।
अविश्वास प्रस्ताव पर बोलते हुए नेता प्रतिपक्ष ने महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराध, प्रदेश की कानून-व्यवस्था, बलौदाबाजार हिंसा, कोरिया जिले के चर्चित अपराध, किसानों की समस्याएं, पेसा कानून के क्रियान्वयन, आदिवासी क्षेत्रों में भूमि अधिग्रहण, अबूझमाड़ में कथित पेड़ कटाई, भारतमाला परियोजना तथा आबकारी विभाग में कथित भ्रष्टाचार जैसे मुद्दे भी उठाए। उन्होंने राज्य सरकार के विजन डॉक्यूमेंट 2047 पर सवाल उठाते हुए कहा कि कृषि और किसानों की उपेक्षा की जा रही है। सदन में सामूहिक विवाह योजना में कथित रूप से नकली मंगलसूत्र वितरित किए जाने का मामला भी गूंजा। कांग्रेस विधायक अनिला भेड़िया ने सरकार से संबंधित एजेंसी के खिलाफ कार्रवाई की जानकारी मांगी। जवाब में मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने कहा कि बालोद जिले से इस संबंध में कोई आधिकारिक शिकायत प्राप्त नहीं हुई है, इसलिए कार्रवाई का प्रश्न नहीं उठता।
विधानसभा में पेश अविश्वास प्रस्ताव पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस जारी है। कांग्रेस सरकार की नीतियों, कानून-व्यवस्था, किसानों, महिलाओं और प्रशासनिक कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठा रही है, जबकि भाजपा सरकार अपनी योजनाओं, विकास कार्यों और उपलब्धियों का पक्ष रख रही है। विधानसभा में वर्तमान संख्या बल के अनुसार भाजपा के 54 विधायक, कांग्रेस के 35 विधायक तथा गोंडवाना गणतंत्र पार्टी का एक विधायक है। ऐसे में राजनीतिक रूप से अविश्वास प्रस्ताव महत्वपूर्ण माना जा रहा है, हालांकि सदन का गणित सरकार के पक्ष में दिखाई दे रहा है।