मंत्री की पत्नी की कंपनी को मूल भूमि से करीब एक किलोमीटर दूर व्यावसायिक क्षेत्र में भूखंड देने के प्रस्ताव पर उठाए सवाल, मुख्य सचिव को पत्र लिखकर निष्पक्ष जांच की मांग
रायपुर। रायपुर विकास प्राधिकरण (RDA) की लाभांडी, कचना एवं सद्दू नगर विकास योजना को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। ईएनटी विशेषज्ञ एवं समाजसेवी डॉ. राकेश गुप्ता ने योजना में भूखंडों के आवंटन को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि योजना तैयार करने में संविधान के अनुच्छेद 14 और 348(3) के प्रावधानों की अनदेखी की गई है। डॉ. गुप्ता ने मुख्य सचिव को पत्र लिखकर योजना निरस्त करने तथा पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।
‘सटी हुई जमीन’ और ‘आस-पास की जमीन’ के अर्थ पर विवाद
डॉ. गुप्ता के अनुसार, छत्तीसगढ़ नगर तथा ग्राम निवेश अधिनियम, 1973 की धारा 50(3)(ii)(f) एवं 50(3)(ii)(g) के तहत मूल भूखंड के पुनर्गठन और उससे सटी हुई भूमि के हस्तांतरण के माध्यम से अंतिम भूखंड तैयार करने का प्रावधान है। उनका आरोप है कि अधिनियम के अंग्रेजी पाठ में प्रयुक्त Adjoining Lands यानी सटी हुई भूमि के स्थान पर हिंदी पाठ में ‘आस-पास की भूमि’ शब्दों का सहारा लेकर कुछ भू-स्वामियों को उनकी मूल जमीन से दूर अंतिम भूखंड देने का प्रस्ताव किया गया है। उन्होंने कहा कि इस अंतर के कारण योजना में भूखंड आवंटन की वैधानिकता पर सवाल उठते हैं। उनके मुताबिक, अंतिम भूखंड क्रमांक 25, 63, 64 और 69 सहित अन्य आवंटनों की भी जांच होनी चाहिए।
मंत्री की पत्नी की कंपनी को भूखंड देने पर उठाए सवाल
डॉ. गुप्ता ने आरोप लगाया कि एक मंत्री की पत्नी की कंपनी को उसकी मूल भूमि से लगभग एक किलोमीटर दूर बलौदा बाजार रोड पर 150 फीट चौड़ी प्रस्तावित सड़क के किनारे व्यावसायिक क्षेत्र के पास अंतिम भूखंड देने का प्रस्ताव है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि मूल भूमि से इतनी दूरी पर भूखंड आवंटित किया जा सकता है, तो अन्य भू-स्वामियों को उनकी जमीन की स्थिति के अनुरूप भूखंड क्यों नहीं दिए गए। उन्होंने इस मामले में संभावित पक्षपात की आशंका जताते हुए कहा कि पूरे आवंटन की निष्पक्ष जांच से वास्तविक स्थिति सामने आ सकती है। ये आरोप हैं; उपलब्ध सामग्री में संबंधित कंपनी या प्राधिकरण का पक्ष शामिल नहीं है।
अनुच्छेद 14 के उल्लंघन का आरोप
डॉ. गुप्ता ने संविधान के अनुच्छेद 14 का हवाला देते हुए कहा कि कानून के समक्ष समानता और समान संरक्षण प्रत्येक नागरिक का अधिकार है। उनके अनुसार, नगर विकास योजना में भूखंडों के आवंटन में समानता के सिद्धांत का पालन हुआ या नहीं, इसकी जांच आवश्यक है। उन्होंने सवाल किया कि क्या सभी भू-स्वामियों के साथ समान मानदंड अपनाए गए और क्या कुछ लोगों को बेहतर व्यावसायिक स्थानों पर भूखंड देने के लिए अलग मापदंड अपनाए गए। उन्होंने अधिकारियों की निर्णय प्रक्रिया और आवंटन के आधार को सार्वजनिक करने की मांग भी उठाई।
RDA में आपत्ति दर्ज, मुख्य सचिव को भी भेजा पत्र
डॉ. गुप्ता ने बताया कि उन्होंने नगर विकास योजना के संबंध में रायपुर विकास प्राधिकरण में अपनी आपत्ति जमा की है। साथ ही मुख्य सचिव को पत्र भेजकर योजना निरस्त करने की मांग की है। उनका कहना है कि नगर विकास योजना का उद्देश्य व्यवस्थित विकास होना चाहिए और इसके लिए कानून तथा संवैधानिक प्रावधानों का पालन जरूरी है। अब इस मामले में संबंधित अधिकारियों का पक्ष और आपत्तियों पर प्रशासन की कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी। योजना की वैधानिकता, भूखंड आवंटन के मानदंड और लगाए गए आरोपों की वास्तविक स्थिति निष्पक्ष जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।