सिपकोन्हा माइनर के टेल एरिया में पानी का संकट: आश्वासन के बाद भी दक्षिण पाटन के खेतों तक पानी नहीं पहुंचा तो शुक्रवार को किसान करेंगे सिंचाई विश्राम गृह का घेराव, कलेक्ट्रेट में धरने की चेतावनी

रानीतराई। तांदुला जलाशय में पर्याप्त पानी होने के बावजूद सिपकोन्हा माइनर के टेल एरिया में स्थित दक्षिण पाटन अंचल के किसानों को खेतों तक सिंचाई का पानी नहीं मिलने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। फसल पकाने के लिए पानी की मांग को लेकर किसान अब आंदोलन की तैयारी में हैं। किसानों ने चेतावनी दी है कि 15 अक्टूबर तक खेतों तक पर्याप्त पानी नहीं पहुंचा, तो शुक्रवार को रानीतराई सिंचाई विश्राम गृह का घेराव किया जाएगा और दुर्ग कलेक्ट्रेट पहुंचकर धरना दिया जाएगा। किसानों के अनुसार, सोमवार 12 अक्टूबर को सिपकोन्हा माइनर के टेल एरिया में पर्याप्त पानी पहुंचाने की मांग को लेकर जिला कलेक्टर दुर्ग को आवेदन दिया गया था। इस दौरान संबंधित अधिकारियों की ओर से नहर नाली में आई तकनीकी खराबी और मरम्मत का हवाला देते हुए दो दिन के भीतर पर्याप्त पानी उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया गया था। लेकिन तय समय सीमा तक पानी नहीं मिलने की स्थिति में किसानों ने सामूहिक आंदोलन का निर्णय लिया है।

आश्वासन के बाद भी खेत प्यासे, जिम्मेदार अधिकारियों पर सवाल

किसान प्रतिनिधि धनराज साहू का कहना है कि फसल के महत्वपूर्ण समय में सिंचाई के लिए पानी नहीं मिलना उनकी आजीविका पर संकट खड़ा कर रहा है। जब जलाशय में पर्याप्त पानी उपलब्ध होने की बात कही जा रही है, तो टेल एरिया के खेतों तक पानी पहुंचाने में परेशानी क्यों हो रही है? तकनीकी खराबी की मरम्मत और जल वितरण की व्यवस्था की वास्तविक स्थिति क्या है? इन सवालों पर किसानों को स्पष्ट जवाब और समयबद्ध समाधान चाहिए। किसानों के मुताबिक, जिला कार्यपालन अभियंता, तांदुला जल संसाधन संभाग दुर्ग आशुतोष शाश्वत से जानकारी लेने के लिए फोन किया गया, लेकिन संपर्क नहीं हो सका। किसानों का कहना है कि पहले बातचीत हो रही थी, लेकिन अब संपर्क नहीं होने से उनकी चिंता बढ़ रही है। हालांकि, अधिकारी का पक्ष सामने आने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाना चाहिए।

नौ गांवों सहित पूरे टेल एरिया के किसानों से एकजुट होने की अपील

असोगा, कौही, रानीतराई, डीघारी, खपरी, चूलगहन, झाड़मोखली, रेंगाकठेरा और पाहंदा सहित टेल एरिया के सभी गांवों के किसानों से आंदोलन में शामिल होने की अपील की गई है। किसानों ने कहा है कि यह लड़ाई किसी व्यक्ति विशेष की नहीं, बल्कि फसल बचाने और सिंचाई के अपने अधिकार के लिए है। किसान प्रतिनिधियों ने स्पष्ट किया है कि यदि गुरुवार 15 अक्टूबर तक पर्याप्त नहर पानी खेतों तक नहीं पहुंचा, तो शुक्रवार को बड़ी संख्या में किसान रानीतराई सिंचाई विश्राम गृह में एकत्रित होकर घेराव करेंगे। इसके बाद दुर्ग जिला मुख्यालय पहुंचकर कलेक्ट्रेट में धरना दिया जाएगा। आंदोलन की लिखित सूचना शासन-प्रशासन को देने की तैयारी भी की जा रही है।

अब प्रशासन की जवाबदेही पर निगाहें

सिपकोन्हा माइनर के अंतिम छोर तक पानी पहुंचाने का मुद्दा अब केवल तकनीकी खराबी तक सीमित नहीं रह गया है। किसानों की मांग है कि संबंधित अधिकारी मौके की स्थिति स्पष्ट करें, नहर की समस्या का तत्काल समाधान कराएं और खेतों तक पर्याप्त पानी पहुंचाना सुनिश्चित करें। अब देखना होगा कि प्रशासन किसानों की चेतावनी को गंभीरता से लेकर समय रहते सिंचाई संकट दूर करता है या किसानों को अपनी मांगों के लिए आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *