रायपुर, 6 अप्रैल 2026। छत्तीसगढ़ में निःशुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE) 2009 के प्रभावी क्रियान्वयन से आर्थिक रूप से कमजोर और वंचित वर्ग के बच्चों को निजी स्कूलों में पढ़ने का अवसर मिल रहा है। इस अधिनियम के तहत प्रदेश के गैर-अनुदान प्राप्त निजी विद्यालयों में प्रारंभिक कक्षाओं में 25 प्रतिशत सीटें आरक्षित की गई हैं। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार सभी वर्गों के बच्चों तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पहुंचाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। इस योजना के अंतर्गत बच्चों को उनके निवास क्षेत्र के भीतर ही प्रवेश दिलाया जाता है, जिससे शिक्षा तक उनकी पहुंच आसान हो सके।
RTE के प्रावधानों के अनुसार निजी स्कूलों को नर्सरी या कक्षा 1 में 25 प्रतिशत सीटें आरक्षित करना अनिवार्य है। इसके बदले राज्य सरकार स्कूलों को प्रति छात्र व्यय के आधार पर प्रतिपूर्ति राशि प्रदान करती है। यह राशि सरकारी स्कूल में प्रति छात्र खर्च या निजी स्कूल की वास्तविक फीस—दोनों में से जो कम हो—उस आधार पर तय की जाती है, जिससे भुगतान प्रक्रिया पारदर्शी बनी रहती है। छत्तीसगढ़ में यह प्रतिपूर्ति राशि अन्य कई राज्यों की तुलना में संतुलित और प्रतिस्पर्धी मानी जा रही है। प्रदेश में कक्षा 1 से 5 तक प्रति छात्र 7000 रुपये और कक्षा 6 से 8 तक 11,400 रुपये वार्षिक दिए जाते हैं। जबकि मध्य प्रदेश, बिहार, झारखंड और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में यह राशि अपेक्षाकृत कम है।
हालांकि ओडिशा, राजस्थान, महाराष्ट्र और कर्नाटक में प्रतिपूर्ति राशि अधिक है, फिर भी समग्र दृष्टि से छत्तीसगढ़ की व्यवस्था को संतुलित और प्रभावी माना जा रहा है। सरकार का उद्देश्य है कि प्रदेश का कोई भी बच्चा आर्थिक कारणों से शिक्षा से वंचित न रहे।