रायपुर, 6 अप्रैल 2026। छत्तीसगढ़ में आगामी शैक्षणिक सत्र 2026-27 से स्कूली शिक्षा में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। National Education Policy 2020 के तहत अब कक्षा तीसरी से ही छात्रों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और कंप्यूटेशनल थिंकिंग (CT) की पढ़ाई कराई जाएगी। इसका उद्देश्य बच्चों को शुरुआती स्तर से ही तकनीक, तार्किक सोच और डिजिटल समझ से जोड़ना है। शिक्षा विभाग के अनुसार, इस विषय को पारंपरिक तरीके से नहीं बल्कि ‘एक्टिविटी बेस्ड लर्निंग’ के माध्यम से पढ़ाया जाएगा, जिससे बच्चे खेल-खेल में कोडिंग और समस्या समाधान की बुनियादी समझ विकसित कर सकें। शुरुआत में यह व्यवस्था Kendriya Vidyalaya Sangathan, Navodaya Vidyalaya Samiti और Central Board of Secondary Education (CBSE) से संबद्ध स्कूलों में लागू की जाएगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि कम उम्र में बच्चों की सीखने की क्षमता अधिक होती है, इसलिए इस स्तर पर तकनीकी शिक्षा देने से उनकी रचनात्मकता, विश्लेषण क्षमता और तार्किक सोच में तेजी से विकास होगा। वहीं, राज्य के सरकारी स्कूलों में भी इस दिशा में तैयारी तेज कर दी गई है। कक्षा छठवीं से AI और कंप्यूटेशनल थिंकिंग को मुख्य पाठ्यक्रम में शामिल करने की योजना पर काम चल रहा है। पाठ्यक्रम और अध्ययन सामग्री तैयार करने का कार्य तेजी से जारी है और आने वाले चार से छह महीनों में इसका अंतिम स्वरूप सामने आने की उम्मीद है।
इस नई व्यवस्था को सफल बनाने के लिए शिक्षकों का प्रशिक्षित होना अनिवार्य किया गया है। State Council of Educational Research and Training (SCERT) द्वारा सभी शिक्षकों के लिए 50 घंटे का विशेष डिजिटल प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। इस प्रशिक्षण में एआई की बुनियादी जानकारी, साइबर सुरक्षा, डिजिटल टूल्स और आधुनिक शिक्षण पद्धतियों पर फोकस रहेगा।
इस पहल के साथ ही शिक्षा क्षेत्र में तकनीक का नया दौर शुरू होने जा रहा है, जो आने वाले समय में छात्रों को भविष्य के लिए बेहतर तरीके से तैयार करेगा।