किताब वितरण व्यवस्था में बड़ा बदलाव: अब स्कूलों में होगी स्कैनिंग, शिक्षकों को नहीं जाना पड़ेगा डिपो

रायपुर। छत्तीसगढ़ में पाठ्यपुस्तक वितरण को लेकर लगातार मिल रही शिकायतों और शिक्षकों के विरोध के बाद अब सरकार ने बड़ी राहत देने वाला फैसला लिया है। अब निजी स्कूलों के शिक्षकों को किताबें लेने के लिए डिपो जाकर घंटों स्कैनिंग नहीं करनी होगी। इसके बजाय वे किताबें सीधे स्कूल ले जा सकेंगे और वहीं स्कैनिंग की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।

इस व्यवस्था में बदलाव की जानकारी छत्तीसगढ़ पाठ्यपुस्तक निगम के अध्यक्ष राजा पांडेय ने दी। उन्होंने बताया कि QR कोड आधारित ट्रैकिंग के लिए स्कैनिंग की व्यवस्था की गई थी ताकि यह पता चल सके कि किताबें स्कूलों तक पहुंची या नहीं। लेकिन व्यावहारिक कठिनाइयों को देखते हुए अब स्कैनिंग स्कूल स्तर पर करने की अनुमति दी गई है।

डिपो में हुआ था हंगामा, शिक्षक भूखे-प्यासे लौटे
गौरतलब है कि हाल ही में गरियाबंद और कांकेर जिलों में किताब वितरण के दौरान भारी अव्यवस्था देखने को मिली थी। 1 जुलाई को 80 से अधिक स्कूलों के शिक्षक सुबह से ही डिपो में जुट गए थे, लेकिन सर्वर डाउन होने के कारण स्कैनिंग में 7-8 घंटे लग गए। कई शिक्षक दिनभर भूखे-प्यासे इंतजार करते रहे। वहीं केवल 30 स्कूलों को ही किताबें मिल सकीं, बाकी को खाली हाथ लौटना पड़ा।

स्कूलों को बंद कर किताब लेने पहुंचे थे शिक्षक
अव्यवस्था का आलम यह था कि कई प्राइवेट स्कूलों को बच्चों की कक्षाएं बंद कर शिक्षकों को किताबें लेने भेजना पड़ा। एसोसिएशन का कहना था कि 10-10 हजार किताबों की मौके पर स्कैनिंग करना संभव नहीं है। न तो वॉशरूम, न खाना-पानी, और न ही इंतजार करने की कोई समुचित व्यवस्था डिपो में थी।

एसोसिएशन ने लगाया भेदभाव का आरोप
प्राइवेट स्कूल मैनेजमेंट एसोसिएशन के अध्यक्ष सुबोध राठी ने पाठ्यपुस्तक निगम पर भेदभाव का आरोप लगाते हुए कहा कि “सरकारी स्कूलों को किताबें सीधे संकुल केंद्र भेज दी जाती हैं, लेकिन निजी स्कूलों को डिपो बुलाकर घंटों खड़ा रखा जाता है। यह दोहरी नीति है, जिससे बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है।”

क्या है नई व्यवस्था?

  • शिक्षक अब किताबें सीधे स्कूल ले जा सकेंगे
  • स्कैनिंग की प्रक्रिया स्कूलों में ही पूरी होगी
  • समय और संसाधनों की बर्बादी रुकेगी
  • निगम द्वारा स्कैनिंग ट्रैकिंग को लेकर तकनीकी निगरानी जारी रहेगी

निगम ने मानी एसोसिएशन की मांग
निजी स्कूलों की मांग पर अब निगम ने व्यवस्था में यह लचीलापन लाकर स्पष्ट किया है कि किताबों की डिलीवरी में देरी, बच्चों की पढ़ाई में रुकावट और शिक्षकों की असुविधा किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं की जाएगी।


Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *