
दुर्ग, 30 जुलाई। वंदे मातरम की 150वीं वर्षगांठ के अवसर पर दुर्ग जिले में 7 से 15 अगस्त तक हर घर तिरंगा अभियान के तहत व्यापक देशभक्ति और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। जिला प्रशासन ने इसे जनभागीदारी से जोड़ते हुए जिला, ब्लॉक और ग्राम पंचायत स्तर तक विशेष आयोजन करने की तैयारी शुरू कर दी है। कलेक्टर अभिजीत सिंह के निर्देश पर सभी विभाग प्रमुखों, जनपद पंचायतों के मुख्य कार्यपालन अधिकारियों तथा संबंधित संस्थाओं को आवश्यक तैयारियां और समन्वय सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। यह आयोजन राज्य स्तर पर निर्धारित चार चरणों में से तृतीय चरण के अंतर्गत किया जा रहा है।
ध्वजारोहण के बाद होगा सामूहिक वंदे मातरम गायन
जारी निर्देशों के अनुसार स्वतंत्रता दिवस 15 अगस्त को जिला मुख्यालय, सभी ब्लॉक मुख्यालयों, ग्राम पंचायतों तथा स्कूल-कॉलेजों में ध्वजारोहण के बाद वंदे मातरम का सामूहिक गायन कराया जाएगा। प्रशासन का उद्देश्य राष्ट्रगान और राष्ट्रभक्ति गीतों के माध्यम से युवाओं और आम नागरिकों में राष्ट्रीय चेतना को मजबूत करना है।
तिरंगा यात्रा से लेकर मशाल रैली तक होंगे आयोजन
अभियान के दौरान जिलेभर में तिरंगा यात्रा, मशाल रैली, देशभक्ति गीत प्रतियोगिता, विचार गोष्ठियां तथा छत्तीसगढ़ी लोकनृत्य प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएंगी। सांस्कृतिक कार्यक्रमों में स्थानीय कलाकारों, विद्यार्थियों, युवा मंडलों और स्वयंसेवी संगठनों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी।
14 अगस्त को विशेष प्रदर्शनी और पुलिस बैंड प्रस्तुति
कार्यक्रमों की श्रृंखला में 14 अगस्त को वंदे मातरम आधारित विशेष प्रदर्शनी आयोजित की जाएगी, जिसमें गीत के इतिहास, स्वतंत्रता आंदोलन में इसकी भूमिका और राष्ट्रीय चेतना पर इसके प्रभाव को प्रदर्शित किया जाएगा। उसी दिन शाम को पुलिस बैंड द्वारा राष्ट्रभक्ति धुनों की प्रस्तुति भी दी जाएगी, जो कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण होगी।
नागरिकों के लिए ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग सुविधा
जनसहभागिता को बढ़ावा देने के लिए प्रशासन ने ऑडियो-वीडियो बूथ स्थापित करने की भी योजना बनाई है। यहां नागरिक वंदे मातरम गायन, देशभक्ति संदेश या सांस्कृतिक प्रस्तुतियों की रिकॉर्डिंग कर सकेंगे। इन रिकॉर्डिंग को बाद में आधिकारिक पोर्टल पर अपलोड किया जाएगा, ताकि जिले की सहभागिता को व्यापक स्तर पर प्रदर्शित किया जा सके। जिला प्रशासन ने सभी शासकीय विभागों, शिक्षण संस्थानों और सामाजिक संगठनों से अभियान को सफल बनाने में सक्रिय सहयोग की अपील की है। अधिकारियों के अनुसार यह आयोजन केवल औपचारिक कार्यक्रम नहीं होगा, बल्कि राष्ट्रीय एकता, सांस्कृतिक गौरव और स्वतंत्रता संग्राम की विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का सामूहिक प्रयास बनेगा।