धमना में श्रीमद भागवत कथा, जिपं सभापति कल्पना नारद साहू बनीं साक्षी, पं कृष्ण प्रांशु शास्त्री बोले -सच्चा प्रेम आत्मा का समर्पण है, और धर्म का मार्ग कभी निराश नहीं करता…

धमना में श्रीमद भागवत कथा, जिपं सभापति कल्पना नारद साहू बनीं साक्षी, पं कृष्ण प्रांशु शास्त्री बोले -सच्चा प्रेम आत्मा का समर्पण है, और धर्म का मार्ग कभी निराश नहीं करता…

जामगांव आर । दक्षिण पाटन के ग्राम धमना में चल रहे श्रीमद भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के छठवें दिवस कथा पांडाल भक्ति और उल्लास से गूंज उठा। श्रीकृष्ण–रुक्मिणी विवाह पर श्रद्धालु झूम उठे और ‘जय श्रीकृष्ण’ के जयघोष से वातावरण दिव्य हो गया। कथा स्थल पर बड़ी संख्या में ग्रामीण, भक्तगण और श्रद्धालु एकत्र हुए। विवाह बारात का दृश्य प्रस्तुत होते ही उपस्थित लोगों ने पुष्प वर्षा कर दिव्यता को और बढ़ा दिया। क्षेत्र की जिला पंचायत सभापति कल्पना नारद साहू भी श्रीकृष्ण–रुक्मिणी विवाह बारात की साक्षी बनीं,उन्होंने भक्तों का स्वागत किया और इस शुभ आयोजन की सराहना की। कथास्थल में नंदकुमार सोनी,भाजयुमो अध्यक्ष नारद साहू,तरुण सोनी, अरुण कुमार सोनी, लक्ष्मी सोनी, अनामिका सोनी सहित ग्रामवासी व श्रोतागण बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।

• प्रेम सच्चा हो, तो भगवान स्वयं मार्ग बनाते हैं

श्रीकृष्ण–रुक्मिणी विवाह प्रसंग के दौरान भागवताचार्य पं. प्रांशु कृष्ण शास्त्री महाराज जी ने भक्ति, प्रेम और समर्पण पर आधारित अत्यंत हृदयस्पर्शी प्रवचन देते हुए बताया कि रुक्मिणी का प्रेम केवल मन का आकर्षण नहीं था, वह आत्मा का समर्पण था और श्रीकृष्ण का आना केवल एक विवाह नहीं, यह सत्य का अधर्म पर विजय थी। जब प्रेम सच्चा हो, तो भगवान स्वयं मार्ग बनाते हैं नदी, पर्वत, दूरी या युद्ध… कुछ भी भक्त और भगवान के बीच रुक नहीं सकता। महाराज जी ने आगे कहा कि भागवत केवल कथा नहीं—यह जीवन का संदेश है। रुक्मिणी हमें सिखाती हैं कि श्रद्धा अडिग हो, और कृष्ण हमें बताते हैं कि जो धर्म का मार्ग चुनता है, उसके जीवन में कभी विलंब हो सकता है, पर निराशा नहीं। भक्ति में अधीरता नहीं, समर्पण चाहिए। यदि प्रेम सच्चा हो, तो भगवान स्वयं बारात लेकर आपके जीवन में उतर आते है।

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