भिलाई। राधिका नगर में प्रस्तावित स्लॉटर हाउस को लेकर विवाद तेज हो गया है। स्थानीय निवासियों के विरोध के बीच अब क्षेत्र के सांसद विजय बघेल भी खुलकर विरोध में आ गए हैं। सांसद ने पर्यावरण विभाग, छत्तीसगढ़ शासन को पत्र लिखकर यह सवाल उठाया है कि रहवासी क्षेत्र में बूचड़खाना खोलने की अनुमति कैसे दी गई। उन्होंने विभागीय अधिकारियों पर नियमों को दरकिनार कर अनुमति जारी करने का आरोप लगाया है। बघेल ने अपने पत्र में यह भी दावा किया कि केंद्र सरकार ने स्लॉटर हाउस निर्माण के लिए जो 17 करोड़ रुपए मंजूर किए थे, उसमें “जमकर बंदरबांट” हुई है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस शासन के दौरान नेता और उनके “चहेते अफसर” इस राशि को हड़प गए। सांसद ने कहा कि स्लॉटर हाउस शुरू करने की नई कवायद केवल निर्माण एजेंसी के बकाया भुगतान के लिए की जा रही है। “यहां केवल ढांचा खड़ा है, लेकिन 17 करोड़ कैसे खर्च हो गए—यह समझ से परे है,” उन्होंने कहा। बघेल ने यह भी कहा कि स्लॉटर हाउस के आसपास कई मंदिर, स्कूल और घनी आबादी है। ऐसे में इसे शहर के बाहर स्थानांतरित करना जरूरी है ताकि लोगों को स्वास्थ्य और पर्यावरण संबंधी परेशानियों का सामना न करना पड़े।
• स्थानीय विरोध तेज—3 हजार से ज्यादा लोगों ने किए हस्ताक्षर
राधिका नगर, सुभाष नगर, सरस्वती नगर और आसपास की कॉलोनियों में स्लॉटर हाउस के खिलाफ जोरदार अभियान चल रहा है। अब तक 3,000 से अधिक लोग हस्ताक्षर कर अपनी आपत्ति जता चुके हैं। निवासियों ने नगरीय निकाय मंत्री अरुण साव और पर्यावरण विभाग के सचिव को भी ज्ञापन सौंपकर स्लॉटर हाउस की अनुमति रद्द करने और अनियमितताओं की जांच की मांग की है। रविवार शाम 6 बजे रहवासी, संस्थान और सामाजिक संगठन मिलकर स्लॉटर हाउस रोड पर कैंडल रैली निकालेंगे, जिसमें बड़ी संख्या में लोगों के शामिल होने की उम्मीद है।
• रहवासियों की पीड़ा—“जीना मुश्किल हो जाएगा”
स्थानीय संस्थाओं के प्रतिनिधि मदन सेन और चंद्रहास सेन ने सांसद को आवेदन देकर कई गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि स्लॉटर हाउस में अवैध गतिविधियां, अव्यवस्थित संचालन और भ्रष्टाचार लंबे समय से बनी समस्या है।
रहवासियों ने कहा कि बूचड़खाना शुरू होने पर—जानवरों के झुंड,बिखरा खून,कुत्तों और गिद्धों की भीड़,हवा में बदबू,और बढ़ते संक्रमण का खतरा पूरे क्षेत्र की शांति और स्वास्थ्य के लिए संकट खड़ा कर देगा। जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों की लापरवाही के कारण स्थिति वर्षों से अनियंत्रित रही है और अब रहवासी किसी भी कीमत पर स्लॉटर हाउस को शहर के भीतर चालू नहीं होने देना चाहते।