जनजातीय गौरव का इतिहास” विषय पर जामगांव आर महाविद्यालय में विशेष व्याख्यान — छत्तीसगढ़ की अस्मिता में जनजातीय समाज के योगदान पर हुई सार्थक चर्चा

जनजातीय गौरव का इतिहास” विषय पर जामगांव आर महाविद्यालय में विशेष व्याख्यान — छत्तीसगढ़ की अस्मिता में जनजातीय समाज के योगदान पर हुई सार्थक चर्चा

जामगांव आर। शहीद डोमेश्वर साहू शासकीय महाविद्यालय जामगांव आर-भरर में “जनजातीय गौरव का इतिहास” विषय पर राजनीति विज्ञान विभाग द्वारा एक विशेष व्याख्यान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. शिखा अग्रवाल ने की। इस अवसर पर मुख्य वक्ता के रूप में शासकीय महाविद्यालय गुण्डरदेही के समाजशास्त्र विषय के प्राध्यापक डॉ. डी. एस. सहारे एवं शासकीय महाविद्यालय उतई के सहायक प्राध्यापक डॉ. राकेश मिंज आमंत्रित थे।

डॉ. डी. एस. सहारे ने अपने व्याख्यान में हलबा, गोंड सहित छत्तीसगढ़ की विभिन्न जनजातियों के गौरवशाली इतिहास और स्वतंत्रता संग्राम में उनके योगदान पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बस्तर क्षेत्र की सांस्कृतिक विविधता, हल्बा विद्रोह और डोंगर अंचल के सामाजिक-आर्थिक योगदान को उदाहरण सहित समझाया। उन्होंने उरांव जनजाति को सबसे शिक्षित जनजातियों में से एक बताते हुए उनके सामाजिक जागरूकता के प्रयासों की सराहना की। वहीं डॉ. राकेश मिंज ने जनजातीय समुदाय के इतिहास, विवाह परंपरा, पंचायत व्यवस्था, गोठूल परंपरा, प्रकृति प्रेम और जड़ी-बूटियों के ज्ञान पर विस्तृत चर्चा की। उन्होंने कहा कि जनजातीय समाज में स्त्री-पुरुष समानता की परंपरा प्राचीन काल से चली आ रही है, जो उनकी सामाजिक प्रगतिशीलता का परिचायक है।

कार्यक्रम की अध्यक्ष डॉ. शिखा अग्रवाल ने अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि विद्यार्थियों को राज्य की जनजातीय विविधता और उनके संघर्षों को जानना आवश्यक है। उन्होंने विद्यार्थियों से बिरसा मुंडा और शहीद वीर नारायण सिंह जैसे जननायकों के योगदान से प्रेरणा लेने की बात कही। डॉ. अग्रवाल ने यह भी कहा कि ऐसे कार्यक्रम छात्रों को न केवल सांस्कृतिक समझ प्रदान करते हैं, बल्कि प्रतियोगी परीक्षाओं में भी ज्ञानवर्धक सिद्ध होते हैं। कार्यक्रम का संचालन एवं संयोजन राजनीति विज्ञान विभाग के प्रभारी ऐश्वर्य ठाकुर ने किया। कार्यक्रम की सफलता में डॉ. नरेशधर दीवान, डॉ. रजनीश तिवारी, मनोज यादव, मुकेश कठौतिया, डॉ. संतोष पांडे, डॉ. अरुणेंद्र तिवारी, डॉ. आबिद हसन खान, श्रीमती चेतना सोनी, डॉ. लता मरकंडे, प्रियम वैष्णव, मनीष साहू, मेजर राम जोशी, पुरन मल शर्मा, गिरीश देशपांडे, आर. डी. भूआर्य, उमेश मंडावी, लोमन तामेश्वरी सहारा, रानी साहू और चंद्रकला का विशेष सहयोग रहा।

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