NDPS केस में रिश्वतखोरी के आरोप से हड़कंप: दुर्ग SSP ने 2 SI को किया सस्पेंड, 3 दिन में मांगी जांच रिपोर्ट

NDPS केस में रिश्वतखोरी के आरोप से हड़कंप: दुर्ग SSP ने 2 SI को किया सस्पेंड, 3 दिन में मांगी जांच रिपोर्ट

वायरल ऑडियो में आरोपी की रिहाई के बदले पैसों की मांग का दावा, वरिष्ठ अधिकारियों तक रकम पहुंचाने के आरोपों की भी जांच शुरू

दुर्ग। नशे के कारोबार के खिलाफ चलाए जा रहे पुलिस अभियानों के बीच दुर्ग जिले में सामने आए एक मामले ने पुलिस महकमे में हड़कंप मचा दिया है। एनडीपीएस एक्ट के एक प्रकरण में आरोपी पक्ष से कथित अवैध वसूली और रिश्वत मांगने के आरोपों के बाद दुर्ग पुलिस अधीक्षक विजय अग्रवाल ने दो सब इंस्पेक्टरों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।

जानकारी के अनुसार, पुरानी भिलाई थाना में दर्ज एक एनडीपीएस मामले में पदस्थ सब इंस्पेक्टर तुलसीराम साहू तथा खुर्सीपार थाना के सब इंस्पेक्टर देवलाल साहू पर आरोपी पक्ष से पैसों की मांग करने के गंभीर आरोप लगे हैं। सोशल मीडिया पर वायरल एक कथित ऑडियो में आरोपी की रिहाई और मामले को प्रभावित करने के एवज में रकम मांगने की बातचीत सामने आने का दावा किया जा रहा है। प्रारंभिक जांच में दोनों अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध पाए जाने पर एसएसपी ने उन्हें निलंबित कर रक्षित केंद्र अटैच कर दिया है। साथ ही मामले की विस्तृत जांच के आदेश भी जारी किए गए हैं।

मामले को और गंभीर तब माना जा रहा है जब वायरल ऑडियो में कथित रूप से यह दावा भी किया गया कि वसूली गई रकम का हिस्सा वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंचाया जाता है। हालांकि इस दावे की अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन जांच एजेंसियां इस पहलू को भी गंभीरता से परख रही हैं। शिकायतकर्ता महिला ने आरोप लगाया है कि पुलिस ने ड्रग्स की वास्तविक मात्रा से अधिक मात्रा दर्शाकर मामला दर्ज किया और परिवार पर दबाव बनाकर पैसे वसूलने की कोशिश की गई। महिला ने साइबर क्राइम टीम के कुछ सदस्यों पर भी दो लाख रुपये मांगने का आरोप लगाया है।

इन आरोपों के सामने आने के बाद दुर्ग एसएसपी विजय अग्रवाल ने छावनी नगर पुलिस अधीक्षक को पूरे मामले की जांच सौंपते हुए तीन दिनों के भीतर प्रारंभिक जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे विभागीय और कानूनी कार्रवाई की जाएगी। यह मामला केवल दो अधिकारियों के निलंबन तक सीमित नहीं है, बल्कि नशे के खिलाफ चलाए जा रहे अभियानों की पारदर्शिता और पुलिस व्यवस्था की जवाबदेही पर भी सवाल खड़े कर रहा है। अब सबकी निगाहें जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं कि क्या जांच आरोपों की जड़ तक पहुंच पाएगी या मामला केवल सीमित कार्रवाई तक सिमट जाएगा।

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