
जिला पंचायत सभापति ललित चोपड़ा ने बिजली विभाग के अधिकारी को हटाने की उठाई मांग, ग्रामीणों से दुर्व्यवहार का भी लगाया आरोप
खैरागढ़। सुशासन तिहार के समाधान शिविर में उस समय माहौल गरमा गया, जब जिला पंचायत सभापति ललित चोपड़ा ने सार्वजनिक मंच से बिजली विभाग के एक जूनियर इंजीनियर पर गंभीर आरोप लगाते हुए कार्रवाई की मांग कर दी। प्रभारी मंत्री लखन लाल देवांगन की मौजूदगी में उठे इस मुद्दे ने कार्यक्रम में मौजूद अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। मामला छुईखदान विकासखंड के गोपालपुर में आयोजित सुशासन तिहार कार्यक्रम का है। सभा को संबोधित करते हुए जिला पंचायत सभापति ललित चोपड़ा ने बिजली विभाग के जूनियर इंजीनियर चेतन सिहारे पर ग्रामीणों से वसूली करने और उन्हें अनावश्यक रूप से परेशान करने के आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि संबंधित अधिकारी की कार्यशैली को लेकर लगातार शिकायतें मिल रही हैं और ऐसे अधिकारियों की जिले में आवश्यकता नहीं है।
सभापति ने मंच से ही प्रभारी मंत्री के समक्ष मांग रखी कि ग्रामीणों की समस्याओं को बढ़ाने वाले अधिकारियों पर तत्काल कार्रवाई की जाए। उन्होंने कहा कि शासन की मंशा जनता को राहत देने की है, लेकिन कुछ अधिकारी अपने व्यवहार और कार्यप्रणाली से सरकार की छवि को नुकसान पहुंचा रहे हैं। ललित चोपड़ा ने यह भी आरोप लगाया कि संबंधित अधिकारी का व्यवहार ग्रामीणों के प्रति ठीक नहीं है। कई लोगों ने उनसे शिकायत की है कि विभागीय कार्यों के नाम पर अनावश्यक दबाव बनाया जाता है और आम नागरिकों को परेशान किया जाता है। उन्होंने कहा कि यदि समय रहते ऐसे मामलों पर रोक नहीं लगाई गई तो जनता का भरोसा प्रशासन से उठ सकता है।
सुशासन तिहार जैसे जनसुनवाई और समाधान केंद्रित कार्यक्रम में इस प्रकार खुले मंच से आरोप लगाए जाने के बाद पूरे क्षेत्र में इस मुद्दे की चर्चा तेज हो गई है। कार्यक्रम में उपस्थित लोगों के बीच भी प्रशासनिक जवाबदेही और अधिकारियों की कार्यशैली को लेकर सवाल उठते रहे। हालांकि कार्यक्रम के दौरान संबंधित जूनियर इंजीनियर की ओर से कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई। वहीं प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार मामले की जांच कराए जाने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता। गौरतलब है कि सुशासन तिहार का उद्देश्य शासन और जनता के बीच संवाद स्थापित कर समस्याओं का त्वरित समाधान करना है। ऐसे में कार्यक्रम के मंच से उठे आरोपों ने स्थानीय प्रशासन के सामने जवाबदेही और पारदर्शिता की नई चुनौती खड़ी कर दी है।