दुर्ग। छत्तीसगढ़ में धान खरीदी शुरू होते ही संकट गहरा गया है। सहकारी समितियों के प्रबंधकों, कंप्यूटर ऑपरेटरों और दैनिक वेतनभोगियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल 14वें दिन भी जारी रही। इसी बीच दुर्ग संभाग के 1800 कर्मचारियों ने सामूहिक इस्तीफा संभाग आयुक्त को सौंप दिया। इससे प्रदेश की धान खरीदी व्यवस्था पूरी तरह ठप होती नजर आ रही है। प्रदेशभर की समितियों में टोकन जारी होना बंद है। किसान धान बेचने के लिए चक्कर काट रहे हैं, लेकिन प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पा रही है। सात जिलों से लगभग ढाई हजार कर्मचारी प्रतिदिन दुर्ग के मानस भवन के पास धरना स्थल पर जुट रहे हैं। इस आंदोलन को समर्थन देने के लिए पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल मंगलवार को धरना स्थल पहुंचे। उनके साथ कई विधायक और कांग्रेस नेता भी मौजूद रहे।
•सरकार पर बघेल का हमला: “तुगलकी फरमान ने व्यवस्था बिगाड़ी”
धरना स्थल पर मीडिया से बातचीत में भूपेश बघेल ने राज्य सरकार को आड़े हाथों लेते हुए कहा—
“15 नवंबर से धान खरीदी शुरू हो गई, लेकिन आज तक कोई किसान धान नहीं बेच पाया। टोकन बंद हैं, कर्मचारी परेशान हैं—यह पूरी तरह सरकार का तुगलकी फरमान है।”उन्होंने आरोप लगाया कि नए आदेशों और सख्ती ने समिति प्रबंधक, सहायक प्रबंधक, लेखापाल से लेकर चपरासी तक सभी कर्मचारियों को काम करने से रोक दिया है।बघेल का आरोप: “एग्रो स्टेट पोर्टल ने डेढ़ लाख किसानों के नाम काटे”बघेल ने कहा कि एग्रो स्टेट पोर्टल में गड़बड़ियों के कारण—1.5 लाख किसानों के नाम बाहर हो गए हैं,हजारों हेक्टेयर जमीन दर्ज नहीं हो पाई,आदिवासी क्षेत्रों में पट्टा पाए किसान धान नहीं बेच पाएंगे उन्होंने आरोप लगाया कि—“यह पूरा षड्यंत्र धान खरीद को अडानी के हाथों में देने की तैयारी है। हिमाचल में सेब खरीद की तरह, छत्तीसगढ़ में भी धान खरीदी अडानी करेगा।”बघेल ने प्रधानमंत्री मोदी और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को जोड़ते हुए कहा—“साय की तारीफ इसलिए हो रही है, क्योंकि यह सब उन्हीं के इशारे पर किया जा रहा है।”
•एग्रेसिव टोन में बोले बघेल: “कर्मचारी डरने वाले नहीं—मैं भी नहीं डरा”
एस्मा और एफआईआर की कार्रवाई पर बघेल ने कहा—“यह सरकार विरोध करने वालों पर FIR ही करती है। लेकिन कर्मचारी डरने वाले नहीं हैं। जैसे मैं नहीं डरा, वैसे ये भी नहीं डरेंगे।” उन्होंने कर्मचारियों से कहा— “आज आप सहकारिता विभाग के कर्मचारी हैं, कुछ दिनों बाद अडानी के कहलाएंगे। इसलिए यह लड़ाई जरूरी है।” बघेल ने ऐलान किया कि कांग्रेस विधानसभा के विशेष सत्र में इस मुद्दे को जोरदार तरीके से उठाएगी।
•महासंघ की घोषणा: 1800 कर्मचारियों का सामूहिक इस्तीफा
आंदोलनकारी कर्मचारियों के महासंघ के कोषाध्यक्ष जागेश्वर साहू ने बताया कि सरकार की कार्रवाई और बर्खास्तगी की चर्चाओं के विरोध में दुर्ग संभाग के 1800 कर्मचारियों ने सामूहिक इस्तीफा सौंप दिया है। दुर्ग में 1500 नियमित और 300 दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी कार्यरत हैं।
•चार सूत्री माँगें—जिन पर कर्मचारी अडिग
मध्यप्रदेश की तर्ज पर 3-3 लाख रुपये प्रबंधकीय अनुदान
उपार्जन कार्य में सुखत धान का स्पष्ट प्रावधान,2018 सेवा नियम में संशोधन व बैंक भर्ती में प्राथमिकता,कंप्यूटर ऑपरेटरों को पूरे 12 माह का वेतन और नियमितीकरण।
साहू ने कहा— “हम किसान के बेटे हैं, धान खरीदी करना चाहते हैं पर मांगें माने बिना काम शुरू नहीं करेंगे। जरूरत पड़ी तो जेल भरो आंदोलन करेंगे।”कर्मचारियों ने याद दिलाया कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने पहले इन्हीं मांगों पर आंदोलन का समर्थन करते हुए तत्कालीन CM बघेल को पत्र लिखा था। आज वही माँगें दोहराने पर हमें FIR और चेतावनियाँ मिल रही हैं।