
रायपुर। सरकारी स्कूलों में अब शिक्षकों के कामकाज का आकलन केवल विद्यार्थियों की उपस्थिति के आधार पर नहीं होगा, बल्कि उनके शैक्षणिक प्रदर्शन में होने वाले सुधार को भी महत्वपूर्ण आधार बनाया जाएगा। इसके लिए प्रदेश के स्कूलों में विद्यार्थियों की ग्रीन-येलो-रेड मैपिंग की व्यवस्था लागू करने की तैयारी है। हर महीने विद्यार्थियों की प्रगति की समीक्षा कर यह देखा जाएगा कि कमजोर और औसत प्रदर्शन वाले कितने बच्चे बेहतर श्रेणी में पहुंचे। योजना के तहत शिक्षक अपनी टीचर्स डायरी में प्रत्येक विद्यार्थी का प्रदर्शन रिकॉर्ड दर्ज करेंगे। बेहतर प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को ग्रीन जोन, औसत प्रदर्शन वाले विद्यार्थियों को येलो जोन और कमजोर प्रदर्शन करने वाले बच्चों को रेड जोन में रखा जाएगा। मासिक समीक्षा में खास तौर पर रेड जोन के विद्यार्थियों की प्रगति पर ध्यान दिया जाएगा।
इस दौरान यह देखा जाएगा कि कितने विद्यार्थी रेड जोन से येलो और येलो जोन से ग्रीन जोन में पहुंचे। विद्यार्थियों की इस प्रगति को शिक्षकों के प्रदर्शन के आकलन और रेटिंग से भी जोड़ा जाएगा। इस व्यवस्था के लिए योजना तैयार करने की जिम्मेदारी समग्र शिक्षा को दी गई है। विभाग टीचर्स डायरी में रिपोर्ट कार्ड को शामिल करने की तैयारी कर रहा है। आगे स्कूलों के आंकड़ों की निगरानी को आसान बनाने के लिए एआई आधारित डेटा मॉनिटरिंग की दिशा में भी काम किया जाएगा।
5000 शिक्षकीय पदों पर भर्ती प्रक्रिया जारी
शासकीय स्कूलों में शिक्षकों के करीब 5000 पदों पर भर्ती प्रक्रिया चल रही है। इनमें सहायक शिक्षक के 2292 और शिक्षक के 1654 पद शामिल हैं। वहीं व्याख्याता के 854 पदों पर भर्ती के लिए शिक्षा विभाग ने कर्मचारी चयन मंडल को प्रस्ताव भेजा है। जल्द ही आवेदन प्रक्रिया शुरू होने की संभावना है। इसके अलावा स्वामी आत्मानंद और विवेकानंद विद्यालयों में 3000 से अधिक पदों पर संविदा भर्ती की प्रक्रिया भी जारी है।
परीक्षा परिणाम सुधारने पर जोर
सीजी बोर्ड की कक्षा 10वीं और 12वीं की परीक्षाओं के परिणाम में इस वर्ष करीब 2 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। आगामी वर्षों में परिणाम को और बेहतर बनाने के लिए परीक्षा पूर्व समीक्षा, ब्लूप्रिंट निर्माण, बेहतर अध्यापन, पालक-शिक्षक बैठक और केंद्रीकृत परीक्षाओं पर जोर दिया जाएगा। शिक्षकों की नियमित उपस्थिति और शैक्षणिक अनुशासन सुनिश्चित करने के लिए आधार आधारित बायोमेट्रिक तथा टीके ऐप के माध्यम से उपस्थिति व्यवस्था भी लागू की गई है।
स्थानीय भाषाओं में शिक्षा को बढ़ावा
प्रदेश में बहुभाषी शिक्षा को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। बस्तर संभाग के 2700 और सरगुजा संभाग के 2368 शिक्षकों को बहुभाषी शिक्षा के लिए प्रशिक्षण दिया गया है। कक्षा पहली से तीसरी तक छत्तीसगढ़ी, गोंडी, हल्बी और सादरी भाषाओं में शिक्षा के अनुरूप पाठ्यपुस्तक तैयार करने की प्रक्रिया जारी है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत कक्षा पहली और दूसरी की हिंदी पुस्तकों में बारहखड़ी को शामिल किया गया है। प्रदेश में 16 स्थानीय और 4 अंतरराज्यीय भाषाओं में पाठ्यपुस्तकों का निर्माण भी किया गया है।
10,538 स्कूलों का युक्तियुक्तकरण, 15,165 शिक्षकों का समायोजन
स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने शुक्रवार को विभाग के दो वर्षों का रिपोर्ट कार्ड पेश किया। उन्होंने बताया कि प्रदेश में 10,538 स्कूलों का युक्तियुक्तकरण किया गया है और 15,165 शिक्षकों एवं प्राचार्यों का समायोजन किया गया। इसके अलावा 453 शिक्षकविहीन और 4729 एकल शिक्षकीय स्कूलों में शिक्षकों की व्यवस्था की गई है। दो वर्षों में 2104 शैक्षणिक पदों पर सीधी भर्ती की गई, जबकि 5000 शिक्षकीय पदों पर भर्ती प्रक्रिया जारी है। विभाग की ओर से शिक्षा की गुणवत्ता, शिक्षकों की उपलब्धता एवं पदोन्नति, भर्ती प्रक्रिया, विद्यार्थियों को मिलने वाली सुविधाओं, स्कूल अधोसंरचना, बहुभाषी शिक्षा और तकनीक आधारित मॉनिटरिंग को प्राथमिकता दी जा रही है। नवा रायपुर स्थित छत्तीसगढ़ संवाद के ऑडिटोरियम में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव डॉ. कमलप्रीत सिंह भी मौजूद रहे।