साइबर ठगी में राहत: 50 हजार तक की बैंक में अटकी रकम बिना कोर्ट-कचहरी पीड़ितों को लौटाने की तैयारी

साइबर ठगी में राहत: 50 हजार तक की बैंक में अटकी रकम बिना कोर्ट-कचहरी पीड़ितों को लौटाने की तैयारी

रायपुर। साइबर ठगी के मामलों में बैंक में होल्ड हुई 50 हजार रुपए तक की रकम अब बिना लंबी कोर्ट-कचहरी प्रक्रिया के पीड़ितों को वापस दिलाने की तैयारी की जा रही है। इसके लिए पुलिस और बैंक प्रबंधन वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सीधे संपर्क करेंगे। पीड़ित की पहचान और दावे की पुष्टि होने के बाद संबंधित रकम रिलीज करने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। प्रदेश में S4C (स्टेट साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर) के गठन के बाद साइबर अपराध में फंसी रकम को पीड़ितों तक जल्द पहुंचाने के लिए व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने की तैयारी है। S4C पुलिस और बैंकों के बीच समन्वय स्थापित करने के साथ ऐसे मामलों की मॉनिटरिंग भी करेगा।

तीन साल में 780 करोड़ से ज्यादा की साइबर ठगी

प्रदेश में पिछले तीन वर्षों के दौरान साइबर ठगी के मामलों में 780 करोड़ रुपए से अधिक की रकम ठगी जा चुकी है। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए करीब 72 करोड़ रुपए की रकम ठगों तक पहुंचने से पहले ही बैंक खातों में होल्ड कराई है। इसके बावजूद कई मामलों में कोर्ट के आदेश के बाद भी पीड़ितों को उनकी रकम वापस नहीं मिल पा रही है। पड़ताल में सामने आया है कि कई पीड़ित पिछले तीन साल से अपनी रकम के लिए पुलिस और बैंक के चक्कर लगा रहे हैं। कोर्ट का आदेश लेकर थाने पहुंचने के बाद भी पुलिस के लिए बैंक स्तर पर सीधे हस्तक्षेप करना आसान नहीं होता। दूसरी ओर, कई बार बैंक यह कहकर रकम लौटाने से इनकार कर देते हैं कि संबंधित राशि किसी अन्य पीड़ित को पहले ही जारी की जा चुकी है। इससे कोर्ट के आदेश के बावजूद रकम की वापसी अटक जाती है।

पुलिस-बैंक के बीच S4C करेगा समन्वय

अब ऐसे मामलों की निगरानी S4C के स्तर से किए जाने की तैयारी है। सेंटर पुलिस और बैंक के नोडल अधिकारियों के बीच समन्वय कर होल्ड रकम की पहचान और उसके वास्तविक दावेदार तक पहुंचाने की प्रक्रिया को तेज करेगा। सरकार ने दो दिन पहले आईजी प्रशांत अग्रवाल को S4C का महानिरीक्षक और गिरिजा शंकर जायसवाल को उप महानिरीक्षक की जिम्मेदारी सौंपी है। इससे साइबर अपराध से जुड़े मामलों में राज्य स्तर पर निगरानी और कार्रवाई का तंत्र मजबूत होने की उम्मीद है।

दूसरे राज्य में पैसा पहुंचा तो सीधे होगा समन्वय

साइबर ठगी के मामलों में अक्सर रकम दूसरे राज्यों के बैंक खातों में ट्रांसफर हो जाती है और आरोपी भी दूसरे राज्य में मौजूद होते हैं। ऐसे में थाना स्तर की पुलिस को दूसरे राज्यों के पुलिस अधिकारियों और बैंकों के नोडल अधिकारियों से संपर्क करने में कई तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। अधिकारियों की रैंक और अंतरराज्यीय समन्वय की कमी भी कार्रवाई में देरी की बड़ी वजह बनती है। S4C के जरिए ऐसे मामलों में दूसरे राज्यों के पुलिस अधिकारियों और बैंक अधिकारियों से सीधे समन्वय किया जा सकेगा। इससे एक ओर आरोपियों तक पहुंचने में तेजी आएगी, वहीं दूसरी ओर बैंक में होल्ड पीड़ितों की रकम को वापस कराने की प्रक्रिया भी तेज होगी।

पीड़ितों को राहत मिलने की उम्मीद

नई व्यवस्था लागू होने के बाद साइबर ठगी के तुरंत बाद पुलिस द्वारा होल्ड कराई गई रकम को लंबे समय तक बैंक और कोर्ट के बीच अटकने से बचाने की कोशिश होगी। खासकर 50 हजार रुपए तक की रकम वाले मामलों में त्वरित सत्यापन और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए प्रक्रिया पूरी कर पीड़ितों को राहत देने पर फोकस रहेगा।

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