सुरपा सोसायटी धान तौल विवाद पर जाँच की मुहर : समिति को मिला क्लीनचिट, भाजपा नेता नारद साहू का पलटवार—शासन और धान खरीदी को बदनाम करने की साजिश

जामगांव आर। पाटन ब्लॉक के सेवा सहकारी समिति सुरपा में धान खरीदी में अनियमितता और अधिक वजन तौलने की शिकायत को लेकर उठे विवाद में जाँच के बाद समिति को क्लीन चिट मिलने के बाद मामले ने अब राजनीतिक रंग ले लिया है। दिलचस्प बात यह है कि शिकायतकर्ता भाजपा नेता धनराज साहू और समिति के प्राधिकृत अध्यक्ष नारद साहू, दोनों ही भारतीय जनता पार्टी से जुड़े हुए हैं, जिससे मामला भाजपा के अंदरूनी टकराव के रूप में देखा जा रहा है। एसडीएम पाटन के निर्देश पर गुरुवार को धान उपार्जन केंद्र में जाँच की गई। जाँच दल अतिरिक्त तहसीलदार ममता टावरी, खाद्य निरीक्षक रामनारायण साहू एवं नोडल अधिकारी मुकेश अहीर की मौजूदगी में किसानों और जनप्रतिनिधियों के सामने धान बोरों का वजन किया गया। जाँच में सभी स्टैक के बोरे 40.605 किलोग्राम पाए गए, जो शासन द्वारा निर्धारित मानक के अनुरूप हैं। जाँच दल ने स्पष्ट किया कि अधिक वजन लेने की शिकायत निराधार पाई गई है। मौके पर विधायक प्रतिनिधि अशोक साहू, कांग्रेस ब्लॉक अध्यक्ष राजेश ठाकुर और सरपंच वरुण देव नेताम भी उपस्थित रहे, जिससे पूरे घटनाक्रम पर राजनीतिक नजर बनी रही। नोडल अधिकारी मुकेश अहीर ने कहा कि रेंडम जांच में कोई गड़बड़ी सामने नहीं आई है और जाँच रिपोर्ट वरिष्ठ अधिकारीयों को भेज दी गई है।
जाँच के बाद समिति अध्यक्ष नारद साहू आक्रामक नजर आए। उन्होंने बिना नाम लिए तीखा हमला करते हुए कहा कि समिति और शासन की छवि खराब करने के उद्देश्य से दुर्भावनापूर्ण शिकायत की गई थी। उन्होंने दावा किया कि सोसायटी में छोटे-बड़े सभी किसानों से टोकन के आधार पर, पारदर्शी और मानक तौल के साथ धान खरीदी की जा रही है और जाँच ने इसे प्रमाणित कर दिया है। वहीं दूसरी ओर, मामले के शिकायतकर्ता भाजपा नेता धनराज साहू से जब इस विषय में प्रतिक्रिया लेने का प्रयास किया गया, तो उन्होंने फिलहाल कोई भी बयान देने से इंकार कर दिया। उनकी चुप्पी को लेकर क्षेत्र में तरह-तरह की राजनीतिक चर्चाएं शुरू हो गई हैं।

सूत्रों के अनुसार पूरा मामला क्षेत्र के एक बड़े भाजपा नेता के बड़े रकबे का आफलाइन टोकन नही कटने के कारण समिति कर्मचारियों पर टोकन काटने के दबाव के बाद उपजा है। कुल मिलाकर, सुरपा धान खरीदी का यह मामला अब प्रशासनिक जाँच से आगे बढ़कर भाजपा के अंदरूनी सियासी समीकरणों और आपसी खींचतान का विषय बनता नजर आ रहा है, जिसकी गूंज आने वाले दिनों में स्थानीय राजनीति में और तेज हो सकती है।

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