बिना TET वरिष्ठता के आधार पर पदोन्नति की मांग, शिक्षक संगठनों ने बनाया संघर्ष मोर्चा

बिना TET वरिष्ठता के आधार पर पदोन्नति की मांग, शिक्षक संगठनों ने बनाया संघर्ष मोर्चा

रायपुर, 13 अगस्त 2026। छत्तीसगढ़ में शिक्षकों की पदोन्नति में TET की अनिवार्यता को लेकर शिक्षक संगठनों ने एकजुट होकर आंदोलन की दिशा में कदम बढ़ाया है। वरिष्ठता के आधार पर बिना TET पदोन्नति और पूर्व सेवा अवधि की गणना कर पेंशन सहित विभिन्न मांगों को लेकर छत्तीसगढ़ शिक्षक संघर्ष मोर्चा का गठन किया गया है। शिक्षक नेताओं संजय शर्मा, वीरेंद्र दुबे और केदार जैन की वर्चुअल बैठक में मोर्चे के गठन का निर्णय लिया गया। मोर्चे के माध्यम से शिक्षकों के विभिन्न लंबित एवं ज्वलंत मुद्दों को एक मंच से उठाने की बात कही गई है। सभी जिलों में 16 अगस्त 2026 को विचार एवं समन्वय बैठक आयोजित करने का निर्णय लिया गया है।

18 अगस्त को शिक्षा विभाग के अधिकारियों को सौंपेंगे ज्ञापन

मोर्चा द्वारा 18 अगस्त को शिक्षा मंत्री, शिक्षा सचिव एवं डीपीआई को ज्ञापन सौंपने की तैयारी है। शिक्षक संगठनों की प्रमुख मांग है कि सभी स्तरों की पदोन्नति में TET की अनिवार्यता संबंधी निर्देश को वापस लिया जाए तथा शिक्षकों को उनकी वरिष्ठता के आधार पर रिक्त पदों पर पदोन्नति दी जाए।

ये पांच प्रमुख मांगें रहेंगी केंद्र में

शिक्षक संघर्ष मोर्चा ने पांच प्रमुख मांगों को प्राथमिकता में रखा है—

1. वरिष्ठता के आधार पर बिना TET के व्याख्याता, शिक्षक तथा प्रधान पाठक प्राथमिक एवं पूर्व माध्यमिक शालाओं के रिक्त पदों पर पदोन्नति दी जाए।

2. पूर्व सेवा अवधि की गणना कर पूर्ण पेंशन का लाभ दिया जाए।

3. वेतन विसंगति दूर करते हुए केंद्रीय वेतनमान के आधार पर छत्तीसगढ़ के शिक्षकों का वेतन निर्धारण किया जाए।

4. विसंगतिपूर्ण 13 फरवरी 2026 के नए भर्ती एवं पदोन्नति नियम को निरस्त किया जाए।

5. प्रशिक्षित सहायक शिक्षक, शिक्षक एवं व्याख्याताओं के लिए B.Ed. हेतु विभागीय ब्रिज कोर्स कराया जाए।

वर्चुअल बैठक में शिक्षक संगठनों के प्रमुख पदाधिकारियों संजय शर्मा, वीरेंद्र दुबे, केदार जैन, सुधीर प्रधान, गिरजाशंकर शुक्ला, देवनाथ साहू, धर्मेश शर्मा, चंद्रशेखर तिवारी, संतोष तांडे और जितेंद्र शर्मा सहित अन्य पदाधिकारी शामिल हुए। शिक्षक नेताओं ने कहा कि शिक्षकों के हितों से जुड़े सभी विषयों को मोर्चे के माध्यम से प्रमुखता से उठाया जाएगा और मांगों के निराकरण के लिए संगठित प्रयास किया जाएगा।

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