
जामगांव आर। विकास और सुशासन के दावों के बीच जामगांव आर क्षेत्र के लोग इन दिनों बिजली विभाग की लापरवाही का खामियाजा भुगत रहे हैं। हालात ऐसे हैं कि क्षेत्र में कब बिजली रहेगी और कब चली जाएगी, इसका कोई निश्चित समय नहीं है। किसी दिन सुबह होते ही बिजली गुल, दोपहर में बिजली गुल, हल्की हवा चली तो बिजली गुल, बूंदाबांदी हुई तो बिजली गुल हो जाती है लगातार हो रही इस अव्यवस्था से लोगों में भारी नाराजगी है। क्षेत्रवासियों का कहना है कि बिजली विभाग की कार्यप्रणाली अब मजाक का विषय बन गई है। लोगों के बीच चर्चा तक होने लगी है कि आखिर इतनी बार बिजली बंद करने के पीछे क्या कारण हैं। जबकि हर साल बिजली दरों में बढ़ोतरी की जा रही है, लेकिन उपभोक्ताओं को सुविधाएं देने के नाम पर विभाग पूरी तरह विफल नजर आ रहा है।
क्षेत्र में लगातार हो रही इस अव्यवस्था से लोगों में भारी नाराजगी है। क्षेत्रवासियों का कहना है कि बिजली विभाग की कार्यप्रणाली अब मजाक का विषय बन गई है। लोगों के बीच चर्चा तक होने लगी है कि आखिर इतनी बार बिजली बंद करने के पीछे क्या कारण हैं। जबकि हर साल बिजली दरों में बढ़ोतरी की जा रही है, लेकिन उपभोक्ताओं को सुविधाएं देने के नाम पर विभाग पूरी तरह विफल नजर आ रहा है। हैरानी की बात यह है कि जामगांव आर सब स्टेशन को पाटन, इरागुड़ा और रानीतराई जैसे तीन अलग-अलग स्रोतों से जोड़ा गया है, ताकि किसी एक लाइन में समस्या आने पर दूसरी लाइन से सप्लाई जारी रखी जा सके। इसके बावजूद क्षेत्रवासियों को निर्बाध बिजली नहीं मिल पा रही है।
वहीं इस गंभीर समस्या पर जनप्रतिनिधियों की चुप्पी भी लोगों को खटक रही है। न सत्ता पक्ष के नेता इस मुद्दे को गंभीरता से उठा रहे हैं और न ही विपक्ष जनता की आवाज बनने की कोशिश कर रहा है। ऐसा लगता है कि आम नागरिकों की रोजमर्रा की समस्याएं अब राजनीतिक दल की प्राथमिकताओं से बाहर हो चुकी हैं। जानकारों का मानना है कि बिजली विभाग लंबे समय से कर्मचारियों की कमी से जूझ रहा है और अधिकांश काम ठेकेदारों व अस्थायी कर्मचारियों के भरोसे चल रहा है। लेकिन यह तर्क जनता की परेशानी का समाधान नहीं हो सकता। बिजली और पानी जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराना शासन और प्रशासन की पहली जिम्मेदारी है। अब सवाल यह है कि जब सरकार आम लोगों को निर्बाध बिजली जैसी बुनियादी सुविधा तक नहीं दे पा रही है, तो विकास और सुशासन के बड़े-बड़े दावों पर जनता कैसे भरोसा करे?