छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग में देश का सबसे बड़ा नक्सल ऑपरेशन ‘ऑपरेशन कगार’ अपने चरम पर है। सोमवार को ऑपरेशन का सातवां दिन है और बीजापुर जिले के कर्रेगुट्टा की पांच हजार फीट ऊंची पहाड़ियों पर फोर्स ने नक्सलियों के सुरक्षित पनाहगार में घुसपैठ कर ली है। 45 डिग्री सेल्सियस की भीषण गर्मी में डीआरजी, सीआरपीएफ, एसटीएफ और बस्तर फाइटर्स के जवान मौत की घाटी कहे जाने वाले इलाकों में जान की बाजी लगाकर डटे हुए हैं।
फोर्स ने अब तक पांच नक्सलियों को ढेर कर दिया है, जिनमें तीन महिला नक्सली शामिल हैं। कर्रेगुट्टा से लेकर कस्तूरपाड़ तक फोर्स की बैकअप पार्टी तैनात है और लगातार रुक-रुक कर फायरिंग हो रही है। हेलीकॉप्टर और ड्रोन से निगरानी तेज कर दी गई है। नक्सली घने जंगल और आईईडी जाल में छिपे हुए हैं और हर चाल के साथ फोर्स को चुनौती दे रहे हैं।
हालात किसी युद्ध क्षेत्र जैसे हैं — जवान नीचे से पहाड़ चढ़ने की कोशिश कर रहे हैं जबकि नक्सली ऊंचाई से हमला करने की ताक में बैठे हैं। तपती चट्टानों और भीषण गर्मी के बीच जवानों की जांबाजी का इम्तिहान जारी है।
इसी बीच नक्सलियों ने तीसरी बार प्रेस नोट जारी कर शांति वार्ता की अपील की है। भारत की कम्युनिस्ट पार्टी के उत्तर पश्चिम सब जोनल ब्यूरो के प्रभारी ‘रूपेश’ ने पत्र जारी कर सरकार से ऑपरेशन रोकने और शांति वार्ता शुरू करने का अनुरोध किया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि नक्सलियों की यह ‘शांति वार्ता’ की अपील असल में एक सुनियोजित चाल है। फोर्स को चकमा देकर एक महीने का वक्त मांगना उनके टॉप लीडर्स को सुरक्षित निकालने की साजिश का हिस्सा है। इससे पहले भी दो बार इसी तरह के पत्र भेजे जा चुके हैं, जिन्हें सरकार ने सिरे से नकार दिया था।
इस बार भी फोर्स के हौसले बुलंद हैं और ऑपरेशन कगार अपने निर्णायक मोड़ की ओर बढ़ रहा है। देश अब सांसें थामे इस ऐतिहासिक अभियान की सफलता का इंतजार कर रहा है।